सीता मैया, भगवान शंकर तथा हनुमान जी की भव्य मूर्तियां लालच के निशाने पर

तिनका परमिशन, पहाड़ खुदाई, बड़े नाम का फायदा उठाने की कोशिश 

• अल्ट्राटेक सीमेंट द्वारा किया जा रहा आस्थाओं पर प्रहार

खान अशु 

भोपाल। जहां एक ओर भारत हिन्दू राष्ट्र बनने की तरफ अग्रसर है, हर तरफ राम नाम की गूंज है, देवी देवताओं के सम्मान के प्रयास प्रबल हैं, वहीं एक अंतर्राष्ट्रीय कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट ने आस्थाओं को धराशाई करने का मन बना रखा है। कंपनी द्वारा एक सरकारी अनुमति को आधार बनाकर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के निशान मिटाने का प्रपंच रचा जा रहा है। मनमानी तरीके से किए जा रहे खनन से भविष्य में इन प्राचीन धरोहर का नाम-ओ-निशान मिट सकता है।

मामला धार जिले की मनावर तहसील के ग्राम देवरा का है। यहां परमार कालीन विशाल शिव मंदिर प्राचीनकाल से स्थित है। जो वर्तमान समय में पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। यहां सीतापुरी में माता सीता की पौराणिक एवं अमुल्य धरोहर अनगिनत प्रमाण के साथ प्राचीन गुफा के रूप में स्थित है। वहीं जंगलों में भगवान शंकर तथा हनुमान जी की भव्य मूर्तियां जिर्णशिर्ण अवस्था में हैं। वहीं अण्डियाव में भव्य पत्थर के नंदी की प्रतिमा है।

नाम की मंजूरी, धरोहर पर निशाना 

सूत्रों का कहना है कि एक बड़े औद्योगिक घराने बिरला समूह से संबद्ध अंतर्राष्ट्रीय कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट ने पुरातत्व विभाग को अंधेरे में रखकर खनन संबंधी अनुमति प्राप्त कर लीं। जिसके अनुसार उसे ग्राम टोंकी स्थिति प्लांट द्वारा खनन हेतु 344.783 हेक्टेयर चूना पत्थर के लिए ग्राम देवरा, सीतापुरी, उदयपुर और मुहाली के लिए बताई जाती हैं। गौरतलब है कि मनावर तहसील के इन ग्रामों की जमीन मध्य प्रदेश को पर्यावरण वन एवं जलवायु के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

हो गया यह खेल

सूत्रों का कहना है कि कंपनी अपने निजी स्वार्थ के लिए पुरानी धरोहरों के साथ खिलवाड़ कर रही है। उसके द्वारा देवरा जैसे स्थान पर, जहां भव्य मंदिर जीर्णशीर्ण अवस्था में मौजूद हैं, इसके आसपास खुदाई कर दी गई है। सूत्रों का कहना है कि चिन्हित और अनुमति प्राप्त स्थान से इतर यह खुदाई की जा रही है। जिससे पुरातन धरोहर के मिटने का खतरा पैदा हो गया है।

बड़े नाम का फायदा

सूत्रों का कहना है कि चूंकि आदित्य बिरला समूह देश में एक नामवर उद्योग समूह है। जिसकी दिल्ली से लेकर मध्यप्रदेश तक तूती बोलती है। इसी ख्याति को भुनाते हुए अल्ट्राटेक सीमेंट द्वारा मनमाने तरीके से खनन किया जा रहा है। इससे होने वाले पुरातत्विक नुकसान को भी गुमराह किया जा रहा है।

दूरी का भी फायदा

बताया जाता है कि इस अव्यवस्था को लेकर पुरातत्व एवं अभिलेखागार विभाग इंदौर को स्थानीय लोगों द्वारा कई बार सूचित किया गया और शिकायत की गई। लेकिन इंदौर से मनावर की दूरी और इस क्षेत्र का दूरस्थ में होना किसी परिणाम तक नहीं पहुंच पाया। बताया जाता है कि इंदौर से कागजों पर ही फैसले कर दिए जा रहे हैं और उनके परिपालन पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सूत्रों का कहना है अल्ट्राटेक द्वारा दिल्ली से मिली अनुमति के नाम पर भी विभाग को गुमराह करके अपने फायदे के लिए खनन कर रहा है।

अब शिकायत भोपाल से लेकर दिल्ली तक 

सूत्रों का कहना है कि प्राचीन धरोहर, धार्मिक आस्थाओं और पर्यावरण के इस नुकसान को लेकर नेशनल एनजीओ नया कारवां ने बीड़ा उठाया है। संस्था इस अव्यवस्था को लेकर भोपाल से लेकर दिल्ली तक आवाज उठाने वाली है, जिससे इस अनमोल प्राचीन संस्कृति को बचाया जा सके। साथ ही जंगलों में जहां-जहां अवशेष हैं, वहां फैक्ट्री के खनन करने पर प्रतिबंध लगाया जा सके।

इनका कहना 

इस मामले में अल्ट्राटेक सीमेंट के मुख्यमहाप्रबंधक

विपिन सक्सेना से बात करना चाही तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

प्राचीन धरोहर और धार्मिक आस्थाओं पर प्रहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिल्ली की अनुमति निरस्त करने और खनन बंद करने तक उच्च स्तरीय प्रयास किए जाएंगे।

मोहम्मद तारिक 

फाउंडर, नया कारवां 

भोपाल

आंखों में उतर आए मदीने के मंजर, जुबां पर अल्लाह का शुक्र

हज 2027 के लिए मप्र से चुने गए 5998 आवेदक, 4060 वेटिंग में

भोपाल। आंखों में खुशी के मारे भर आए आंसुओं का सैलाब था, जुबां पर अल्लाह का शुक्र और दिल में उठते हुए हजारों खयालात... देवास के मोहम्मद इरफान ने पहली बार हज आवेदन किया था, इस लॉटरी प्रक्रिया में वे चुन लिए गए थे। वे खुदकिस्मत करार दे रहे थे कि पहली बार में उनके लिए हज का बुलावा आ गया।

हालात भोपाल में उस वक्त बने जब मुम्बई हज कमेटी ऑफ इंडिया से प्रदेश के हज आवेदकों का कुर्रा कंप्यूटर पर डिस्प्ले हुआ। प्रदेश के कुल 10058 आवेदकों का कुर्रा किया। जिनमें से प्रदेश के कोटे के मुताबिक 5998 लोगों को हज पर जाने के लिए चुना गया। इसके बाद करीब 4060 लोगों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया है। अन्य प्रदेशों से बचे हुए कोटे से ऐसे आवेदकों को एडजस्ट किया जाएगा। गत वर्ष भी प्रदेश को मिले अतिरिक्त कोटे से बड़ी संख्या में लोगों को हज पर जाने का मौका मिला था। चुने गए हाजियों में 65+ आयु के 972 आवेदकों को आरक्षित श्रेणी में रखा गया है, जबकि उनमें 65 महिलाएं ऐसी भी हैं, जो बिना मेहरम के हजयात्रा पर जाएंगी।

अभी से तैयारी शुरू करें: नदवी

हज हाउस में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत में शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम साहब कासमी ने तिलावत -ए-कुरआन की। इस मौके पर मौजूद काजी-ए-शहर सैयद मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि एक दौर था, जब हज सफ़र मुश्किल हुआ करता था और हज आसान था। लेकिन अब सफ़र आसान हो गया है और हज मुश्किल बात हो गई है। उन्होंने कहा कि अपनी दैनिक जिंदगी की आदतों की वजह से यह हालात बने हुए हैं। उन्होंने चुने गए हाजियों को मशविरा दिया कि अभी से हज की तैयारी शुरू करें, पैदल चलने, दुआएं सीखने और सफर की परेशानियों की आदत डालें, ताकि हज सफ़र में दिक्कत न आए। इस मौके पर मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने कहा कि हज और हाजियों की खिदमत नसीब की बात है। अल्लाह ने उन्हें सेंट्रल हज कमेटी से लेकर प्रदेश हज कमेटी तक में बहुत काम करने का मौका दिया, जिसके लिए वे अल्लाह के शुक्रगुजार हैं। डॉ पटेल ने कहा कि उनके कार्यकाल में हज हाउस निर्माण, हज इम्बोरकेशन प्वाइंट और हज मुसाफिरों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की गईं। इस मौके पर हज कमेटी की प्रशासनिक अधिकारी डॉ फरजाना ग़जाल ने भी विचार व्यक्त किए।

उत्साह खत्म या कमेटी की अलाली

हज हाउस में आयोजित कुर्रा प्रसारण का लाइव प्रसारण देखने के लिए गिनती के लोग हाजिर हुए थे। हज आवेदकों की तादाद कमेटी कर्मचारियों और मीडिया से भी कम कही जा सकती है। इसको लेकर उठी बात पर जिला हज कमेटी अध्यक्ष असलम इलयास ने कहा कि यह प्रक्रिया हाजियों की सुविधा के लिए ही की गई थी। कमेटी ने आवेदकों को कुर्रा आयोजन का दावतनामा भेजा ही नहीं, कारण यह है कि ऑनलाइन कुर्रा आवेदक अपने स्थान से ही देख सकते हैं, उन्हें भोपाल तक आने जाने की परेशानी से निजात देने के लिए यह कयास किया गया था।

फैक्ट फाइल 

प्रदेश से आवेदक 10058

प्रदेश का हज कोटा 5998

65+ बुजुर्ग हजयात्री 972

बिना मेहरम की हज्जानी 65

वेटिंग लिस्ट में शामिल 4060

यहां हर दिन चुनाव जारी, ताकि बनी रहे सहकारिता की भावना

रोज आते हैं प्रस्ताव, दौड़ जाती है फाइल

खान अशु 

भोपाल। लोकसभा, विधानसभा, नगरीय निकाय या पंचायतों के चुनाव का एक निर्धारित समय है, जिसके लिहाज से यहां की चयन प्रक्रिया आकार लेती है। लेकिन प्रदेश का एक विभाग ऐसा भी है, जहां हरदिन कोई न कोई चुनाव आकार लेता दिखाई देता है। प्रदेशभर में समितियों की बड़ी तादाद इसकी वजह है।

नजारा प्रदेश के सहकारिता विभाग का है। जहां चुनावी मौसम हर रोज मंडराने के हालात बनते हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस समय प्रदेशभर में करीब 54000 सहकारी समितियां काम कर रही हैं। दुग्ध, सब्जी, खाद, गृह निर्माण, राशन समेत कई बातों से जुड़ी इन समितियों में से करीब आधी ऐसी हैं, जिनपर चुनावी प्रक्रिया लागू है। जबकि खाद, बीज आदि से जुड़ी करीब 5 हजार समितियाँ इस समय निष्क्रिय हैं।

इधर प्रस्ताव, उधर चुनाव

विभाग की कार्यप्रणाली इस तरह तैयार की गई है कि किसी भी सहकारिता समय की निर्धारित अवधि पूर्ण होने से पहले ही उसकी चुनावी प्रक्रिया शुरु कर दी जाती है। किसी भी समिति से चुनाव प्रस्ताव मिलते ही विभाग अपने काम में जुट जाता है। सदस्य सूची, चुनाव तिथि, निर्वाचन अधिकारी और चुनाव पश्चात चुनी गई समिति को अधिकार देने की भूमिका वे निभाते हैं। कार्य की द्रुत गति का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि दफ्तर में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की टेबल पर किसी लंबित फाइल का निशान दिखाई नहीं देता है। आज का काम आज ही, की तर्ज पर इस दफ्तर में काम किया जा रहा है।

पारदर्शिता प्रथम

विभाग के बड़े से लेकर छोटे अधिकारी तक और निचले स्तर के क्लेरिकल स्टॉफ तक सतत कैमरे की निगरानी में बने हुए हैं। जहां उच्च अधिकारी अपने मातहतों पर निगरानी रखते हैं, वहीं बड़े अफसरों पर भी नजर बनी रहे, यह व्यवस्था इस कार्यालय में बनाई गई है।

सबका सहयोग, सबको आदर

सतपुड़ा भवन के एक फ्लोर पर स्थित इस सहकारिता निर्वाचन विभाग में हर आगंतुक को आत्मीय व्यवहार मिलता है। यहाँ आने वाले किसी भी जिज्ञासु या याचक को उसके प्रश्न का मुनासिब जवाब देने के लिए हर स्तर के अधिकारी मौजूद हैं। आने वाले हर व्यक्ति को संतुष्टि के साथ वापस भेजने की परम्परा सहकारिता विभाग के इस कार्यालय ने तय कर रखी है।

सूर्या रोशनी ने लॉन्च किए नए किचन एप्लायंस और BLDC सीलिंग फैन

भोपाल में हुआ डीलर मीट का आयोजन

भोपाल। देश की अग्रणी उपभोक्ता विद्युत एवं लाइटिंग उत्पाद निर्माता कंपनी सूर्या रोशनी ने अपने उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए अत्याधुनिक किचन एप्लायंस और ऊर्जा दक्ष BLDC मोटर तकनीक से लैस नए सीलिंग फैन लॉन्च किए हैं। इन नए उत्पादों की जानकारी भोपाल में आयोजित कंपनी की डीलर मीट में दी गई, जिसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में डीलरों और व्यापारिक साझेदारों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में कंपनी के सीईओ वसुमित्र पांडेय ने कहा कि सूर्या रोशनी लगातार उपभोक्ताओं की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक, ऊर्जा-कुशल और भरोसेमंद उत्पाद बाजार में उतार रही है। उन्होंने बताया कि नए किचन एप्लायंस और BLDC सीलिंग फैन अत्याधुनिक तकनीक, बेहतर गुणवत्ता और कम बिजली खपत के साथ तैयार किए गए हैं, जिससे ग्राहकों को बेहतर अनुभव मिलेगा।

इस अवसर पर सूर्या सेल्स के नेशनल हेड बिपिन ममगाईं ने कंपनी की नई उत्पाद श्रृंखला की विशेषताओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि BLDC मोटर वाले नए सीलिंग फैन पारंपरिक पंखों की तुलना में काफी कम बिजली की खपत करते हैं, वहीं कंपनी के किचन एप्लायंस आधुनिक रसोई की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान कंपनी ने अपने औद्योगिक योगदान पर भी प्रकाश डाला। बताया गया कि मध्यप्रदेश के मालनपुर स्थित सूर्या रोशनी की फैक्ट्री में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 5,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है, जिससे प्रदेश के औद्योगिक विकास और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल रहा है।

भोपाल में आयोजित इस डीलर मीट में नए उत्पादों की प्रस्तुति के साथ-साथ भविष्य की व्यावसायिक रणनीतियों, बाजार की संभावनाओं और डीलर नेटवर्क को और अधिक मजबूत बनाने पर भी चर्चा की गई। कंपनी ने विश्वास जताया कि नई उत्पाद श्रृंखला उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी और बाजार में मजबूत पहचान बनाएगी।

अदनान खान: दो डायलॉग से शुरू कहानी पहुंची रुपहले पर्दे तक

थिएटर, फिल्म और वेब सीरीज के सफल निर्देशक की प्रेरणादायक कहानी

सैयद रिजवान अली 

बाकानेर/भोपाल। हर कलाकार की कहानी तालियों से शुरू नहीं होती। कुछ कहानियाँ रिहर्सल हॉल की धूल, बैकस्टेज की भागदौड़ और अनगिनत संघर्षों से जन्म लेती हैं। अदनान खान की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक ऐसा कलाकार, जिसने मंच पर आने से पहले झाड़ू उठाई, चाय लाने की ड्यूटी निभाई, दो संवादों वाले सिपाही का किरदार निभाया और फिर धीरे-धीरे अभिनय, निर्देशन तथा कास्टिंग की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।

अदनान खान का सफर भोपाल के रंगमंच से शुरू होकर मुंबई की फिल्म और वेब सीरीज इंडस्ट्री तक पहुँचा है। उन्होंने अभिनेता, लेखक, कास्टिंग डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर, Supervising Director और क्रिएटिव सुपरवाइज़र जैसी कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। वे न केवल एक कुशल निर्देशक हैं, बल्कि एक संवेदनशील लेखक भी हैं, जो भाषा और साहित्य की गहरी समझ रखते हैं।

उर्दू भाषा के प्रति उनका विशेष लगाव उनके काम में स्पष्ट झलकता है। वे उर्दू को केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भावनाओं और संस्कृति को अभिव्यक्त करने का माध्यम मानते हैं। यही संवेदनशीलता उनके लेखन और निर्देशन को अन्य कलाकारों से अलग बनाती है। आज जब डिजिटल प्लेटफार्मों ने कहानी कहने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है, अदनान खान ने इस बदलाव को अपनाया और वर्टिकल ड्रामा तथा डिजिटल फिक्शन में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनका मानना है कि माध्यम चाहे कोई भी हो, एक अच्छी और ईमानदार कहानी हमेशा अपने दर्शकों तक पहुँचती है। आइए, अदनान खान के इस प्रेरणादायक सफर को विस्तार से जानते हैं।

इंदौर से भोपाल तक: जड़ों की यात्रा

अदनान खान का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में हुआ। वर्ष 2005 में उनका परिवार भोपाल आकर बस गया। भोपाल की गलियों, बोली और संस्कृति ने उन्हें इस कदर अपनाया कि वे खुद मज़ाक में कहते हैं कि वे “पूरी तरह भोपाली” हो गए थे। पढ़ाई में वे स्वयं को कभी होनहार छात्र नहीं मानते। मन में एम.बी.ए. करने का सपना ज़रूर था, लेकिन भीतर कहीं यह एहसास भी था कि उनका रास्ता शायद किसी दफ़्तर की नौकरी तक सीमित नहीं है, बचपन से अभिनेता सलमान खान उनके पसंदीदा रहे। उनकी फ़िल्में और व्यक्तित्व देखकर वे अक्सर कल्पना करते कि एक दिन वे भी अभिनय की दुनिया का हिस्सा बनेंगे। मगर यह सपना उन्होंने लंबे समय तक अपने दिल में ही छिपाकर रखा।

पिता ने बिना पूछे पढ़ लिया बेटे का सपना

उनके बड़े कज़िन इद्राक हाशमत एक ईद स्पेशल “घड़ी डिटर्जेंट पाउडर” विज्ञापन में दिखाई दिए। अदनान ने वह विज्ञापन न जाने कितनी बार देखा, सोशल मीडिया पर साझा किया और अपने दोस्तों को भेजा। यहीं से उनके पिता ने समझ लिया कि बेटे का झुकाव किस ओर है। मीडिया से जुड़े होने के कारण वे मनोरंजन जगत की चुनौतियों से परिचित थे। उन्होंने बेटे को डाँटा नहीं, बल्कि एक अलग रास्ता चुना। वे अदनान को वरिष्ठ रंगकर्मी स्वर्गीय इरफ़ान सौरभ के थिएटर समूह “पल्लव भोपाल” लेकर गए। उनके मन में एक विचार था, अगर अभिनय का सपना केवल आकर्षण है, तो थिएटर की कठिन साधना उसे कुछ ही दिनों में समाप्त कर देगी। लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा।

अभिनय नहीं… पहले झाड़ू

थिएटर में पहले दिन अदनान को कोई भूमिका नहीं मिली। गुरु का आदेश था, “पहले बैठकर देखो, सीखो और समझो। मंच पर आने की जल्दी मत करो।” उनके हाथ में स्क्रिप्ट नहीं, झाड़ू आई। रिहर्सल हॉल की सफाई उनकी पहली जिम्मेदारी बनी। कुछ समय बाद उन्हें कलाकारों के लिए चाय लाने का काम मिला। आज वे मुस्कुराते हुए कहते हैं कि थिएटर ने उन्हें अभिनय से पहले विनम्रता सिखाई। कई महीनों बाद उन्हें एक सिपाही का छोटा-सा किरदार मिला, जिसमें केवल दो संवाद थे। वे उन दो पंक्तियों का दिनभर अभ्यास करते, ताकि प्रस्तुति के दौरान गुरु की डाँट न सुननी पड़े। उन्हें उस समय यह अंदाज़ा नहीं था कि यही दो संवाद आगे चलकर उनके पूरे जीवन की दिशा बदल देंगे।

रंगमंच ने उन्हें केवल अभिनय नहीं सिखाया। बोलने का तरीका, चलने का आत्मविश्वास, लोगों का सम्मान करना, अनुशासन और टीम के साथ काम करना, ये सब उन्होंने थिएटर से सीखा। धीरे-धीरे अभिनय उनका शौक नहीं, जीवन बन गया।

तकिए के नीचे रखे 100 रुपये

उस दौर में थिएटर से कोई आमदनी नहीं होती थी। हर सुबह उठने पर अदनान को अपने तकिए के नीचे ₹100 रखे मिलते। उनके पिता बिना कुछ कहे यह पैसा रख दफ्तर जाते थे, ताकि बेटे के आने-जाने का खर्च निकल सके। अदनान रोज़ लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलकर बस स्टॉप तक जाते, फिर बस से रिहर्सल स्थल पहुँचते। कई बार देर रात तक अभ्यास चलता और आख़िरी बस छूट जाती, तो वे पैदल ही घर लौटते। जब पिता ने बेटे का यह संघर्ष देखा, तो उन्होंने उसके लिए सेकंड हैंड एक मोटरसाइकिल खरीद दी। अब तकिए के नीचे ₹100 की जगह ₹200 मिलने लगे। अदनान मानते हैं कि उस समय उनके पिता ने केवल आर्थिक मदद नहीं की, बल्कि उनके सपनों का भार भी अपने कंधों पर उठाया।

नौकरी से ज़्यादा मंच की पुकार

घर में नौकरी करने का दबाव बढ़ता जा रहा था। वे इंटरव्यू देने जाते, लेकिन लौटकर किसी न किसी वजह से नौकरी ठुकरा देते। इसी दौरान उन्होंने कई टेलीविज़न धारावाहिकों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। मेहनताना इतना नहीं होता था कि जीवन बदल जाए, लेकिन इतना ज़रूर होता था कि कुछ दिनों का पेट्रोल और छोटे-मोटे खर्च निकल सकें।

भोपाल: रंगमंच की नींव और पहली बड़ी क्षति

भोपाल के रंगमंच ने अदनान को जो सीख दी, वह जीवन भर उनके साथ रही। यहाँ उन्होंने कई नाटकों में काम किया और एक कुशल अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनका सबसे चर्चित नाटक “दारा शिकोह” रहा, जिसमें उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी। इस ऐतिहासिक नाटक ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का दिल जीता।

लेकिन 10 जनवरी 2019 को उनके प्रथम गुरु स्वर्गीय इरफ़ान सौरभ का निधन हो गया। यह घटना उनके जीवन का सबसे कठिन दौर लेकर आई। कई महीनों तक वे स्वयं को संभाल नहीं पाए। भविष्य धुंधला दिखाई देने लगा। कुछ समय उन्होंने एक समाचार चैनल में विशेष कार्यक्रमों के एंकर के रूप में भी काम किया, लेकिन कैमरे के सामने होने के बावजूद उन्हें मंच की कमी महसूस होती रही।

दूसरी शुरुआत और एक और अपूरणीय क्षति

कुछ समय बाद उनकी मुलाकात स्वर्गीय प्रदीप अहिरवार से हुई। यहीं से उनके जीवन का दूसरा अध्याय शुरू हुआ। उन्होंने दोबारा थिएटर में सक्रिय वापसी की। अभिनय के साथ-साथ कास्टिंग डायरेक्टर और असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में भी काम शुरू किया। धीरे-धीरे आमदनी भी होने लगी और जिम्मेदारियाँ भी बढ़ने लगीं। इसी दौरान “भगवान बिरसा मुंडा” और “दारा शिकोह” जैसे नाटकों ने उन्हें रंगमंच पर नई पहचान दिलाई।

लेकिन 28 जून 2023 को स्वर्गीय प्रदीप अहिरवार का अचानक कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। यह केवल एक निर्देशक का जाना नहीं था, बल्कि एक मित्र, मार्गदर्शक का बिछड़ना था। इस कठिन समय में अदनान और उनके साथियों ने निर्णय लिया कि उनके मित्र का सपना अधूरा नहीं रहेगा। लगभग छह महीनों के अथक प्रयासों के बाद उन्होंने रंग मोहल्ला की गतिविधियों को फिर से संगठित किया और नए उत्साह के साथ नाट्य प्रस्तुतियाँ प्रारंभ कीं।

मुंबई: नई संभावनाओं का शहर

मुंबई में आने के बाद अदनान को यहाँ की फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री के कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला। उन्होंने बड़े प्रोडक्शन हाउस में काम करना शुरू किया और कैमरे के पीछे की उन जिम्मेदारियों को समझा जो किसी भी सफल परियोजना की रीढ़ होती हैं। यहाँ उन्होंने महसूस किया कि रंगमंच और फिल्म में काम करने का तरीका कितना अलग है। उन्होंने इस नए माध्यम को अपनाया और खुद को ढाला। इस दौरान उन्होंने अभिनेता, असिस्टेंट डायरेक्टर, Supervising Director और क्रिएटिव सुपरवाइज़र जैसी भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने कई बड़े वेब शोज में Supervising Director के रूप में काम किया, जहाँ उनकी जिम्मेदारी पटकथा की निरंतरता, निर्देशन समन्वय, कलाकारों के प्रदर्शन और पूरे क्रिएटिव विजन को बनाए रखने की थी।

आमिर खान से मुलाकात: एक यादगार पल

हर कलाकार के जीवन में कुछ ऐसे पल आते हैं जो उनके करियर की दिशा बदल देते हैं। अदनान खान के जीवन में ऐसा ही एक पल तब आया जब उनकी मुलाकात हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार आमिर खान से हुई। अदनान ने आमिर खान को अपने चर्चित नाटक “दारा शिकोह” के बारे में बताया। इस नाटक की ऐतिहासिक विषयवस्तु और पृष्ठभूमि ने आमिर खान का विशेष ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने इस नाटक को लाइव देखने की इच्छा व्यक्त की। इस मुलाकात ने अदनान को अपनी कला पर और अधिक भरोसा दिया और उन्हें लगा कि वे सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

उर्दू साहित्य और संवाद लेखन की कला

अदनान खान को उर्दू भाषा और साहित्य में विशेष रुचि है। उन्होंने कई परियोजनाओं में उर्दू अनुवाद और संवाद रूपांतरण का कार्य किया। उनके लिए उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भावनाओं और संस्कृति को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। जब वे संवाद लिखते हैं, तो वे भाषा के प्रवाह, लय और भावनात्मक गहराई का विशेष ख्याल रखते हैं। उनके लिखे संवादों में एक अलग सी मिठास और गहराई होती है, जो दर्शकों को पात्रों से जोड़ती है।

उनकी प्रमुख रचनाएं

प्रमुख रचनाएँ: कहानियाँ जो जुड़ीं दर्शकों से अदनान खान ने अपने करियर में कई ऐसी परियोजनाओं पर काम किया है जो दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुई हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में “Farooq Aur Maryam”, मनोवैज्ञानिक थ्रिलर “The Dark Child” और थिएटर की दुनिया पर आधारित “Natak Jaari Hai” जैसी परियोजनाएँ शामिल हैं। “Farooq Aur Maryam” एक ऐसी कहानी है जो मानवीय रिश्तों और भावनाओं की गहराई को दिखाती है। “The Dark Child” एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है जो मानव मन के अंधेरे पहलुओं को दिखाती है। “Natak Jaari Hai” थिएटर की दुनिया पर आधारित एक परियोजना है, जो अदनान के लिए कुछ खास है क्योंकि वे खुद रंगमंच से आते हैं।

पंद्रह वर्षों की रंगयात्रा

लगभग पंद्रह वर्षों के थिएटर अनुभव में अदनान खान ने अभिनेता, निर्देशक, लेखक, सहायक निर्देशक और कास्टिंग प्रोफेशनल के रूप में अनेक जिम्मेदारियाँ निभाईं। उन्होंने कई नाटकों का निर्देशन किया, नए कलाकारों के साथ काम किया और मंच से मिले अनुभव को कैमरे की दुनिया तक पहुँचाया, आज वे फिल्मों, वेब सीरीज़ और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में बतौर लेखक, निर्देशक और कास्टिंग प्रोफेशनल सक्रिय हैं। उनका मानना है कि रंगमंच ही वह विद्यालय है जिसने उन्हें कहानी कहने की असली कला सिखाई।

भविष्य की राह

आने वाले वर्षों में उनका लक्ष्य ओटीटी और सिनेमा के लिए ऐसी कहानियाँ रचना है जो मनोरंजन के साथ संवेदनाओं और समाज की सच्चाइयों को भी सामने लाएँ। वे लगातार नए प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रहे हैं और निर्देशन के क्षेत्र में अपनी पहचान को और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

तीन लोग, जिनके बिना यह सफर अधूरा था

अदनान खान आज भी अपनी यात्रा का सबसे बड़ा श्रेय तीन व्यक्तियों को देते हैं:

1. अपने पिता को, जो हर परिस्थिति में उन पर विश्वास बनाए रखते हैं।

2. अपने प्रथम गुरु स्वर्गीय इरफ़ान सौरभ को, जिन्होंने उन्हें रंगमंच की पहली शिक्षा दी।

3. और स्वर्गीय प्रदीप अहिरवार को, जिन्होंने उन्हें कलाकार से नेतृत्वकर्ता बनने की राह दिखाई।

आज जब वे पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उन्हें मंच पर बोले गए दो संवाद नहीं, बल्कि झाड़ू, चाय की केतली, तकिए के नीचे रखे वे 100 रुपये और अपने गुरुओं की सीख सबसे पहले याद आती है। शायद यही वजह है कि उनके लिए सफलता कोई मंज़िल नहीं, बल्कि उन लोगों के विश्वास का सम्मान है जिन्होंने एक साधारण लड़के के भीतर छिपे कलाकार को सबसे पहले पहचाना।

अदनान खान की कहानी उन सभी युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। यह सिखाती है कि सफलता के लिए केवल अवसरों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि खुद को लगातार विकसित करते रहना चाहिए और हर मौके को सीखने और आगे बढ़ने का अवसर बनाना चाहिए।

"सेफ क्लिक 2.0 ” अभियान सिखा रहा सायबर फ्रॉड से बचने के तरीके

*BVM के बच्चों ने सीखे सुरक्षा के गुर

भोपाल। राजधानी भोपाल भी अब कोचिंग संस्थानों का एक बड़ा हब माने जाना लगा है ब्रह्मा विष्णु महेश कोचिंग के संस्थापक ने गरीब और असहाय बच्चों के लिए एक मुफ्त कंप्यूटर कोचिंग शुरू कर समाज को बदलने वाली एक सराहनीय और बेहतरीन पहल की है। डिजिटल युग में कंप्यूटर का ज्ञान बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके भविष्य को उज्जवल करने के लिए बेहद जरूरी है वहीं आज BVM (ब्रह्म विष्णु महेश) कोचिंग संस्थान द्वारा एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया इस सेमिनार में थाना प्रभारी निशातपुरा मनोज पटवा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की साथ ही संस्थान के सदस्यों ने पौधे देकर पटवा सहित समस्त पुलिस स्टॉफ का स्वागत सत्कार किया साथ ही सेमिनार के माध्यम से कोचिंग संस्थान के मालिक विकास मेहरा ने बताया की हम पिछले कई दिनों से बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए कई तरह के नए नए प्रयास निरंतर करते रहते है जिससे बच्चों को अच्छी एजुकेशन मिल सके बच्चों के उत्साह वर्धन होता रहे उसके लिए समय समय पर आयोजन करते है और बच्चों को सम्मानित भी करवाते है !

अब मिलेगी निशुल्क शिक्षा BVM की मैनेजिंग डायरेक्टर कशिश चक्रवर्ती बताती है की आज से हमारा एक और नया अभियान शुरू हो रहा है जिसके माध्यम से हम ऐसे बच्चों को भी पढ़ा सकेंगे जिनकी सिर्फ माँ मजदूरी कर बच्चों का पालन पोषण करती है और वो उनको पढ़ाने में सक्षम नहीं है और कुछ ऐसे बच्चे जो घर परिवार से वाकई बिलकुल सक्षम नहीं है मगर उन्हें पड़ना है और भविष्य में कुछ करने की इक्षा रखते है ऐसे हीं बच्चों को हम BVM के माध्यम से शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करेंगे।

जागरूक रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे - उप निरीक्षक कमलेश चौहान 

उपनिरीक्षक कमलेश चौहान ने बताया की अगर सेफ क्लिक करेंगे तो सुरक्षित रहेंगे और सायबर सुरक्षा से बचना है तों हमें जागरूक होना पड़ेगा यह एक अपराध है जो पर्दे के पीछे से होता है कौन कर रहा है कौन नहीं उसको देखना असम्भव है इसलिये हमें जागरूक होने की आवश्यकता है हमें लालची नहीं होना है सोशल मीडिया पर सेफ क्लिक करकर सुरक्षित रहना है 

"रुक जाना नहीं, तू कहीं हार के  

कांटों पे चल के मिलेंगे साये बहार के..." - थाना प्रभारी मनोज पटवा 

मनोज पटवा ने बच्चों से कहा की जीवन में मुश्किलों से डरना नहीं है मुश्किलें जीवन में आती जाती रहतीं है जीवन में ज़ब भी कभी लगे की आज निराशा ज्यादा है और कहीं अगर हम हार जाते है तो हमको बिलकुल भी निराश नहीं होना है!

बच्चों के उत्साह वर्धन के लिए थाना प्रभारी मनोज पटवा ने अपनी सुरीली आवाज़ में "रुक जाना नहीं , तू कहीं हार के....

कांटों पे चल के मिलेंगे साये बहार के..." की चार लाइनों को गुनगुनाया वहीं थाना प्रभारी पटवा ने कोचिंग के लिए कहा की ब्रह्मा विष्णु महेश कोचिंग की तरफ से आप बहुत कुछ सीखेंगे इनका अभियान काबिल- ए-तारीफ़ है इसके लिए विकास मेहरा और पूरी टीम को में बधाई देता हूँ साथ ही सीखने की कोई उम्र नहीं होती इसलिए सीखते रहिए और आगे बढ़ते रहिए।

थाना निशातपुरा पुलिस द्वारा लगातार बच्चों को उनके अधिकारों और कानून के बारे में बताया जा रहा है। किस तरह से हमें सायबर फ्रॉड से बचना है किन-किन माध्यमों से सायबर फ्रॉड होते है साइबर अपराध इंस्टाग्राम, फेसबुक, हाउस अरेस्ट , गलत APK डाउनलोड , तथा एक गलत क्लिक से भी आपके साथ फ्रॉड या हैकिंग जैसी घटना हो सकती है इन्ही संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई साथ ही थाना प्रभारी मनोज पटवा ने बताया की अव्यरनेश का मतलब सिर्फ सायबर अपराध से नहीं है हमारे लिए ट्रैफिक अव्यरनेश भी बहुत जरुरी है हमें हेलमेट को लेकर भी जागरूक रहना चाहिए।

1930 और cybercrime.gov.in पर कर सकते है शिकायत 

Asi सतेंद्र चौबे ने बताया की अगर आपके साथ कभी कोई सायबर फ्रॉड हो जाता है तो आप उसकी शिकायत 1930 और सायबर क्राइम की वेबसाइट पर जाकर कर सकते है अब हर एक थाने में एक सायबर डेस्क की नियुक्ति है आप आपकी कम्लेंट की जानकारी वहाँ भी आ कर दे सकते है। सायबर के इस कार्यक्रम में थाना निशातपुरा से राजेंद्र राजपुत, दीपक , और पूजा सहित अन्य पुलिस बल भी मौजूद रहा।

10 हजार करोड़ से संवारी 3 लाख से ज्यादा संरचनाएं, सीएम डॉ. मोहन बोले- जल संरक्षण में एमपी नंबर-1

•⁠ ⁠'जल गंगा संवर्धन अभियान-2026' का समापन

•⁠ ⁠राजगढ़ को दी 352.65 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

•⁠ ⁠जल के बिना नहीं की जा सकती जीवन की कल्पना

भोपाल/राजगढ़। 'कपिल मुनि की तपोस्थली राजगढ़ जिला जल संचय के कार्यों में अग्रणी बना है। यह जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के अंतर्गत श्रेष्ठ कार्य करने वाले 6 जिलों में शामिल है। राज्य सरकार ने 19 मार्च से 30 जून तक 100 दिन के अभियान में कुएं, बावड़ी, तालाब, नदियों, अमृत सरोवर और प्राचीन जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया। यह प्रसन्नता का विषय है कि जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 में लगभग 10 हजार करोड़ लागत से 3 लाख 62 हजार के अधिक जल स्त्रोतों का पुनरोद्धार किया गया है। उन्होंने कहा कि इन्हीं प्रयासों से देश के बड़े राज्यों में मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में अग्रणी बना है।' यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही। सीएम डॉ. यादव 30 जून को राजगढ़ में आयोजित 'जल गंगा संवर्धन अभियान-2026' के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांगों को ट्राय साइकिल और महिलाओं को स्कूटी की चाबी दी। इस दौरान राजगढ़ जिले के पर्यटन विकास पर केंद्रित कॉफी टेबल बुक का अनावरण भी हुआ। समारोह में राजगढ़ के 405 स्व-सहायता समूहों को 20 करोड़ की सहायता राशि सहित अन्य हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अब वर्षा जल के संचयन, नालों की सफाई और नदियों के पुनर्जीवन की दिशा में यह अभियान आगे बढ़ रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 में राजगढ़ जिले में 341 करोड़ से अधिक लागत के 30 से अधिक विकास कार्य किए गए। आज 247 करोड़ 40 लाख के 14 भूमि-पूजन और 100 करोड़ से 17 विकास कार्यों का लोकार्पण हुआ है, जिसमें जीरापुर का सांदीपनि विद्यालय भी शामिल है। आज इस जिले में 30 करोड़ की लागत से निर्मित पुल का लोकार्पण हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के अंतर्गत देशभर में जल संरक्षण के लिए अनेक कार्य हुए हैं। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जल ही पृथ्वी पर प्रकृति और जीवन का आधार है। पंच तत्वों में जल ऐसा तत्व है, जिसका सनातन संस्कृति में जल का विशेष महत्व है। हमारे शरीर में 70 प्रतिशत से अधिक जल की मात्रा है। इसीलिए नदी, तालाब, कुएं, बावड़ी सहित सभी जल रचनाएं आनंदित करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पार्वती, चंबल, कालीसिंध और क्षिप्रा आगे जाकर पवित्र गंगा नदी में मिलती हैं। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने जल संचयन के इस अभियान को जल गंगा नाम दिया। यह गंगा बेसिन का क्षेत्र है।  

भावी पीढ़ियों के लिए बचाना है जल 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता सभी के लिए मिसाल है। इससे सीख लेकर हमें कठिन समय में मित्र की सहायता करें, लेकिन एहसान नहीं जताना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने लगातार तीसरे वर्ष जल संरक्षण अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस साल अलनीनो के प्रभाव से कम वर्षा का अनुमान है, इसीलिए प्रदेश में अमृत सरोवर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, नदी संरक्षण जैसे जल स्त्रोतों के संरक्षण कार्य निरंतर जारी रहेंगे। आज जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 का समापन हो रहा है, लेकिन हमें भावी पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए पानी की बूंद-बूंद का संरक्षण करने का संकल्प लेना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भव्य सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को उपज का पूरा लाभ दिया और 100 लाख से अधिक मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन कर अन्नदाताओं को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान किया है। वर्ष 2023 में राज्य में सिंचित भूमि का रकबा 44 लाख हेक्टेयर था, जो अब बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। बीते 3 साल में ही राजगढ़ जिले में सिंचाई का रकबा 50 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर ढाई लाख हेक्टेयर हो चुका है। राजगढ़ में पालायन रुक गया और युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिलने लगा है। राज्य सरकार हम महीने लाड़ली बहनों को 1500 रुपए भेजकर रक्षाबंधन मना रही है। किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि और स्कूली बच्चों को नि:शुल्क ड्रेस, कॉपी, किताबें, साइकिलें प्रदान कर रही है। हमारी सरकार हर वर्ग के कल्याण के लिए काम कर रही है। 

सिंहस्थ-2028 की भव्य तैयारियां जोरों पर

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में सिहस्थ-2028 के भव्य आयोजन के लिए बाबा महाकाल की कृपा से सभी तरह के प्रबंधन किए जा रहे हैं। सिंहस्थ में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन आने का अनुमान है। श्रद्धालुओं के लिए आवागमन के मार्ग, भोपाल से राजगढ़, उज्जैन, मंदसौर तक नई सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है। सिंहस्थ भारत ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। ऐसे में उज्जैन में सभी प्रकार के प्रबंधन हो रहे हैं। इससे विपक्षी दल नाखुश है। लेकिन हमारी सरकार विकास यात्रा को जारी रखने में किसी से डरने और दबने वाली नहीं है। हमारी सरकार सभी प्रकार के विकास कार्यों पर काम करती रहेगी।

सीएम डॉ. यादव ने कीं ये घोषणाएं

इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने द्वारिका योजना के अंतर्गत सारंगपुर और पचोर सहित राजगढ़ की सभी नगरपालिकाओं में सड़क विकास के कार्यों की घोषणा की। उन्होंने भैंसवामाता के भव्य-दिव्य लोक निर्माण के लिए प्रस्ताव मंजूर करने की भी घोषणा की। इसके अलावा उन्होंने इसके प्रथम चरण के लिए 20 करोड़ की राशि भी प्रदान कर दी।

एक-एक बूंद करें संचित

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान में अब तक हुए सभी कार्यों को सरकार प्रमाणित करती है। राजगढ़ ऐसा जिला है, जहां पानी की कमी है और यह जिला बाहर के पानी का संचय कर अपनी जरूरतों को पूरा करता है। इस साल बारिश के मौसम में कम वर्षा का अनुमान है। नदियों के उद्गम स्थल सूखे हैं। हम सभी को पानी की एक-एक बूंद संचित कर भावी पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करना है। कम वर्षा से डरने की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार और सभी अधिकारी-कर्मचारी जनभागीदारी से जल संरक्षण के प्रयास कर रहे हैं।

अली बाबा, चालीस चोर वाली मंडली, इस जनपद पंचायत में मचा है भ्रष्टाचार का घमासान

उमरबन में भ्रष्ट पंचायत सचिवों को सीईओ का वृहदहस्त

खान अशु 

भोपाल। एक, दो, पांच नहीं बल्कि पूरा का पूरा घान ही भ्रष्टाचार की कढ़ाई में गोते खाता नजर आ रहा है। इनकी उड़ती पतंग को हवा देने के वह जिम्मेदार बैठे हैं, जिनको इनकी निगरानी के लिए पाबंद किया गया था। 

मामला धार जिले के उमरबन ब्लॉक का है। यहां पंचायत अधिनियम की सिरे से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। थोकबंद सचिवों ने सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया और जिम्मेदार इनका कवच बन गए। सूत्र इसके पीछे अधिकारियों का भी भ्रष्टाचार मामले में बराबर का शरीक होना बताते हैं।

चला ऐसा चक्र

सूत्रों का कहना है कि उमरबन जनपद पंचायत की करीब 61 ग्राम पंचायत के अधिकांश सचिव लगातार भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। एक बड़े भ्रष्टाचार में यह साबित भ्रष्टाचारी यह पाए गए। पंचायत अधिनियम की धारा 40 और 92 के मुताबिक इन करीब 22 लोगों का निलंबन होना था, साथ ही इनके वित्तीय अधिकार पर भी पाबंदी लगना थी। सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2011 से 2015 के बीच हुए इस मामले को तत्कालीन अधिकारियों ने बेइमानी की बिना पर छिपा दिया। बताया जाता है कि खानापूर्ति की कार्यवाही में इन सभी भ्रष्ट सचिवों को जनपद में ही दूसरी पंचायतों में ट्रांसफर कर दिया गया। साथ ही भ्रष्टाचार गंगा बहती गंगा को बहते रहने के लिए इन सभी को वित्तीय अधिकार भी सौंप दिए गए। नतीजा यह है कि हालात जस के तस बने हुए हैं और पंचायत राज की खिल्ली उड़ाई जा रही है।

नई घोड़ी, नया दाम

उमरबन जनपद पंचायत में नए सीईओ के रूप में रोहित पचौरी नाम अधिकारी पदस्थ हो गए हैं। तमाम पिछले कारनामों से वाकिफ पचौरी ने सभी सचिवों को काली कमाई का खुला ऑफर दे दिया है। 

नपेंगे पचौरी भी

जानकारों का कहना है कि सरकारी व्यवस्था के तहत पदभार संभालते ही वर्तमान अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी उस मामले की रिपोर्टिंग और जांच में सहयोग करना होती है। यदि वर्तमान अधिकारी को अपने पूर्ववर्ती कार्यकाल में हुए घोटालों या वित्तीय अनियमितताओं का पता चलता है, तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधन 2018 के तहत उनका कर्तव्य बनता है कि वे इसकी लिखित रिपोर्ट तुरंत अपने उच्च अधिकारियों, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) या राज्य सतर्कता आयोग/एसीबी को दें। लेकिन सूत्र बताते हैं कि पिछले कार्यकाल में हुए घोटालेबाजी को पचौरी ने न तो उच्च अधिकारियों को सूचित किया, और न ही भ्रष्ट सचिवों के खिलाफ कोई एक्शन लिया।

नियमानुसार उन्हें जांच एजेंसियों को इस बारे में सूचित करना था। साथ ही सरकारी नियमावली के अनुसार, वर्तमान अधिकारी को घोटाले वाले प्रोजेक्ट्स का विशेष ऑडिट करवाने की सिफारिश भी करना थी। बताया जा रहा है कि वर्तमान सीईओ पचौरी पर घोटाले को जानबूझकर छुपाने, साक्ष्य नष्ट करने, और अपने पूर्ववर्ती को बचाने की कार्यवाही ही सकती है। जिसके लिए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम या भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत षड्यंत्रकर्ता या सबूत नष्ट करने का दोषी मानकर कार्यवाही की जा सकती है।

फ़ारूक़ और मरियम से अदनान की नई उड़ान

रंगमंच से वेब सीरीज़ तक... अभिनय, लेखन और निर्देशन का अनवरत सफ़र

खान आशु

भोपाल। रानी कुबरी गणेश, ओरछा के राम, दारा शिकोह और काहिलों की जमात जैसे चर्चित नाटकों से अपनी पहचान बनाने वाले युवा रंगकर्मी अदनान आज अभिनय के साथ-साथ लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी अलग छाप छोड़ रहे हैं।

दो दर्जन से अधिक नाटकों में अभिनय करते-करते कब उनका रुझान लेखन और निर्देशन की ओर बढ़ गया, इसका एहसास उन्हें स्वयं भी नहीं हुआ। रंगमंच के प्रति उनका समर्पण और निरंतर सीखने की ललक उन्हें नए मुकामों की ओर ले जा रही है।

एक डायलॉग जिसने बदल दी ज़िंदगी

"टक से मौत को छूकर दो मिनट में वापस आ जाता हूँ..."

फिल्म अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का यह चर्चित संवाद अदनान के जीवन में निर्णायक मोड़ बनकर आया। इस संवाद की मिमिक्री और अभिनय ने उन्हें रंगमंच की दुनिया में कदम रखने का आत्मविश्वास दिया और अगले ही दिन वे मंच की प्रतिष्ठित शख्सियत राजीव बाबा के सान्निध्य में पहुँच गए।

तनवीर और मरहूम इरफान साहब जैसे मार्गदर्शकों से सीखते हुए उनका सफर आगे बढ़ा और फिर प्रदीप अहिरवार के साथ रंगकर्म की नई दिशाएँ खुलती चली गईं।

दिल्ली से मुंबई तक, मंच से वेब सीरीज़ तक

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, इलाहाबाद समेत अनेक शहरों में रंगमंच, टीवी धारावाहिकों और वेब सीरीज़ के अनुभवों ने अदनान की कला को परिपक्व बनाया। उनकी लेखनी पर मरहूम हाजी अनवर साहब और मशहूर शायर डॉ. राहत इंदौरी की साहित्यिक विरासत की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। लेखन के प्रति उनकी समझ और संवेदनशीलता उन्हें समकालीन युवा रचनाकारों में अलग पहचान दिलाती है।

'फ़ारूक़ और मरियम' — सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता

आज अदनान अपनी नई वेब सीरीज़ "फ़ारूक़ और मरियम" के साथ सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म्स पर मौजूद हैं। दर्शकों के बीच इस सीरीज़ को लगातार सराहना मिल रही है और इसकी कहानी को लेकर उत्सुकता बढ़ती जा रही है।

अदनान के बारे में 

वर्टिकल ड्रामा सीरीज "नाटक जारी है" के निर्माता, लेखक और निर्देशक अदनान खान रंगमंच की दुनिया से जुड़े एक बेहद प्रतिभाशाली फिल्ममेकर और थिएटर आर्टिस्ट हैं। वे मुंबई के मनोरंजन उद्योग में सक्रिय हैं और मुख्य रूप से उर्दू एडॉप्टेशन, स्क्रीन राइटिंग और डायलॉग स्पेशलिस्ट के रूप में जाने जाते हैं। अदनान खान लंबे समय से ग्राउंड थिएटर और नाटकों से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि "नाटक जारी है" में उन्होंने रिहर्सल और बैकस्टेज की बारीकियों को इतने असली और मजेदार ढंग से दिखाया है। वे नाटकों के उर्दू रूपांतरण और गहरे संवाद लिखने में माहिर हैं। अदनान ने इस सीरीज को पूरी तरह एक स्वतंत्र प्रोजेक्ट के रूप में खुद लिखा और निर्देशित किया है। उन्होंने मोबाइल दर्शकों की नब्ज को पहचानते हुए पारंपरिक थिएटर को आधुनिक रील्स/वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट (9:16 आस्पेक्ट रेशियो) में ढालकर पेश किया है। अदनान खान अपने काम और सीरीज के सभी नए एपिसोड्स को मुख्य रूप से अपने सोशल मीडिया हैंडल्स जैसे Adnan Khan Facebook और इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर रिलीज करते हैं। 

अदनान का मानना है कि उनकी यात्रा अभी शुरुआत भर है। मंज़िल से अधिक उन्हें सफ़र पर भरोसा है, क्योंकि रुकना और ठहर जाना उनकी शब्दावली का हिस्सा नहीं है।

फ़ारूक़ और मरियम से अदनान की नई उड़ान

रंगमंच से वेब सीरीज़ तक... अभिनय, लेखन और निर्देशन का अनवरत सफ़र

खान आशु

भोपाल। रानी कुबरी गणेश, ओरछा के राम, दारा शिकोह और काहिलों की जमात जैसे चर्चित नाटकों से अपनी पहचान बनाने वाले युवा रंगकर्मी अदनान आज अभिनय के साथ-साथ लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी अलग छाप छोड़ रहे हैं।

दो दर्जन से अधिक नाटकों में अभिनय करते-करते कब उनका रुझान लेखन और निर्देशन की ओर बढ़ गया, इसका एहसास उन्हें स्वयं भी नहीं हुआ। रंगमंच के प्रति उनका समर्पण और निरंतर सीखने की ललक उन्हें नए मुकामों की ओर ले जा रही है।

एक डायलॉग जिसने बदल दी ज़िंदगी

"टक से मौत को छूकर दो मिनट में वापस आ जाता हूँ..."

फिल्म अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का यह चर्चित संवाद अदनान के जीवन में निर्णायक मोड़ बनकर आया। इस संवाद की मिमिक्री और अभिनय ने उन्हें रंगमंच की दुनिया में कदम रखने का आत्मविश्वास दिया और अगले ही दिन वे मंच की प्रतिष्ठित शख्सियत राजीव बाबा के सान्निध्य में पहुँच गए।

तनवीर और मरहूम इरफान साहब जैसे मार्गदर्शकों से सीखते हुए उनका सफर आगे बढ़ा और फिर प्रदीप अहिरवार के साथ रंगकर्म की नई दिशाएँ खुलती चली गईं।

दिल्ली से मुंबई तक, मंच से वेब सीरीज़ तक

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, इलाहाबाद समेत अनेक शहरों में रंगमंच, टीवी धारावाहिकों और वेब सीरीज़ के अनुभवों ने अदनान की कला को परिपक्व बनाया। उनकी लेखनी पर मरहूम हाजी अनवर साहब और मशहूर शायर डॉ. राहत इंदौरी की साहित्यिक विरासत की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। लेखन के प्रति उनकी समझ और संवेदनशीलता उन्हें समकालीन युवा रचनाकारों में अलग पहचान दिलाती है।

'फ़ारूक़ और मरियम' — सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता

आज अदनान अपनी नई वेब सीरीज़ "फ़ारूक़ और मरियम" के साथ सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म्स पर मौजूद हैं। दर्शकों के बीच इस सीरीज़ को लगातार सराहना मिल रही है और इसकी कहानी को लेकर उत्सुकता बढ़ती जा रही है।

अदनान के बारे में 

वर्टिकल ड्रामा सीरीज "नाटक जारी है" के निर्माता, लेखक और निर्देशक अदनान खान रंगमंच की दुनिया से जुड़े एक बेहद प्रतिभाशाली फिल्ममेकर और थिएटर आर्टिस्ट हैं। वे मुंबई के मनोरंजन उद्योग में सक्रिय हैं और मुख्य रूप से उर्दू एडॉप्टेशन, स्क्रीन राइटिंग और डायलॉग स्पेशलिस्ट के रूप में जाने जाते हैं। अदनान खान लंबे समय से ग्राउंड थिएटर और नाटकों से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि "नाटक जारी है" में उन्होंने रिहर्सल और बैकस्टेज की बारीकियों को इतने असली और मजेदार ढंग से दिखाया है। वे नाटकों के उर्दू रूपांतरण और गहरे संवाद लिखने में माहिर हैं। अदनान ने इस सीरीज को पूरी तरह एक स्वतंत्र प्रोजेक्ट के रूप में खुद लिखा और निर्देशित किया है। उन्होंने मोबाइल दर्शकों की नब्ज को पहचानते हुए पारंपरिक थिएटर को आधुनिक रील्स/वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट (9:16 आस्पेक्ट रेशियो) में ढालकर पेश किया है। अदनान खान अपने काम और सीरीज के सभी नए एपिसोड्स को मुख्य रूप से अपने सोशल मीडिया हैंडल्स जैसे Adnan Khan Facebook और इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर रिलीज करते हैं। 

अदनान का मानना है कि उनकी यात्रा अभी शुरुआत भर है। मंज़िल से अधिक उन्हें सफ़र पर भरोसा है, क्योंकि रुकना और ठहर जाना उनकी शब्दावली का हिस्सा नहीं है।