लखनऊ में 24 फरवरी से विशेष प्रदर्शनी, डाक टिकटों से जानिए जनगणना की कहानी
* ‘गिनती में आओ’ प्रदर्शनी में डाक अभिलेखों के जरिए सामने आएगा भारत की जनगणना का अनोखा सफर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार द्वारा राजधानी में एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। ‘गिनती में आओ: भारत में जनगणना का डाक इतिहास’ विषय पर आधारित यह प्रदर्शनी 24 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित होगी। इसका उद्देश्य छात्रों, शोधार्थियों और आम नागरिकों को ऐतिहासिक दस्तावेजों से जोड़ते हुए जनगणना के विकासक्रम से परिचित कराना है।
प्रदर्शनी का उद्घाटन 24 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे शीतल वर्मा (निदेशक, जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण) द्वारा किया जाएगा। यह आयोजन महानगर विस्तार स्थित शहीद स्मारक भवन, लखनऊ में होगा। प्रदर्शनी प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।

* डाक अभिलेखों में छिपी जनगणना की कहानी
प्रदर्शनी की विशेषता यह है कि इसमें डाक टिकटों, पोस्टमार्क, पुराने पत्रों और अन्य डाक अभिलेखों के माध्यम से भारत में जनगणना की ऐतिहासिक यात्रा को प्रस्तुत किया जाएगा। आमतौर पर जनगणना को केवल आंकड़ों तक सीमित समझा जाता है, लेकिन यह प्रदर्शनी बताएगी कि आज़ादी के बाद सूचना प्रसार, प्रशिक्षण सामग्री भेजने और सरकारी संवाद स्थापित करने में डाक विभाग की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

* नई पीढ़ी के लिए सीखने का अवसर
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि देश के विकास की बुनियाद है। डाक टिकटों और अभिलेखीय दस्तावेजों के माध्यम से जनगणना के इतिहास को समझाने का यह प्रयास नई पीढ़ी को अतीत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा।
इस प्रदर्शनी का संयोजन अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलुरु के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. विकास कुमार द्वारा किया गया है। आयोजन विशेष रूप से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों के लिए उपयोगी साबित होगा तथा अभिलेखीय स्रोतों के माध्यम से आधुनिक भारत को समझने की नई संभावनाएं प्रस्तुत करेगा।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया कंप्यूटर लैब व वेबसाइट का लोकार्पण
लखनऊ। राजधानी के अर्जुनगंज स्थित महामना सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में नवनिर्मित कंप्यूटर लैब एवं विद्यालय की वेबसाइट का लोकार्पण आनंदीबेन पटेल द्वारा किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अभिभावक, गणमान्य नागरिक एवं क्षेत्रीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में विद्यार्थियों और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिसमें सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों का विशेष योगदान है। यहां से शिक्षित विद्यार्थी ज्ञान और संस्कारों से परिपूर्ण होकर देश के विकास में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने बालिका शिक्षा पर विशेष बल देते हुए कहा कि जिस प्रकार माता-पिता बालकों की शिक्षा पर ध्यान देते हैं, उसी प्रकार बालिकाओं की शिक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। तभी राष्ट्र का संतुलित और समग्र विकास संभव है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें और उनकी शिक्षा पर निरंतर ध्यान दें।
राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में 1 से 8 वर्ष तक की आयु को बच्चों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसी अवस्था में संस्कारों का बीजारोपण होता है। इस दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की उन्होंने सराहना की।
विद्यालय के विकास में योगदान देने वाले दानदाताओं को राज्यपाल ने शाल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति के सदस्य, आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियाँ एवं क्षेत्र के सम्मानित नागरिक भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सौरभ मालवीय (क्षेत्रीय मंत्री, विद्या भारती उत्तर प्रदेश) ने की। विशिष्ट अतिथियों में रामजी सिंह (प्रदेश निरीक्षक, विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश), डॉ. मदन लाल ब्रह्हभट्ट (निदेशक, कल्याण सिंह अति विशिष्ट कैंसर संस्थान) तथा संजय जी (सह प्रांत प्रचारक) उपस्थित रहे।
विद्यालय के प्रबंधक विनीत मिश्रा ने संस्थान की विकास यात्रा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। प्रधानाचार्य डॉ. सुभाष पाण्डेय ने अतिथियों का परिचय एवं स्वागत किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन सुरेन्द्र मिश्रा (कोषाध्यक्ष) ने किया।
समारोह में प्रमुख रूप से नरेंद्र राय, डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, अखिलेश वर्मा, विनय, रुद्र, अवधेश, सुमन तिवारी, अमित मौर्य, अशोक सिंह, रमाकांत, रतनलाल, शशिकांत सहित विद्यालय परिवार के समस्त शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में अखिलेश शुक्ला (अध्यक्ष, सरस्वती शिशु मंदिर अर्जुनगंज) ने सभी अतिथियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
लखनऊ में डबल डेकर बस पलटी, 6 की मौत, 21 घायल
लखनऊ । राजधानी के गोसाईगंज इलाके में सोमवार शाम 4:30 बजे एक बड़ा हादसा हुआ। जौखंडी गांव के पास पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर लुधियाना (पंजाब) से दरभंगा (बिहार) जा रही डबल डेकर बस अनियंत्रित होकर पलट गई।

घटना में प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार 6 लोगों की मौत हो गई जबकि 21 यात्री गंभीर रूप से घायल हैं। बस में कुल लगभग 40 यात्री सवार थे।

पुलिस और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर बस में फंसे यात्रियों को निकाला। क्रेन की मदद से बस को उठाने का प्रयास किया गया। घायल यात्रियों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे का कारण चालक को झपकी आना बताया जा रहा है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को सूचित किया जा रहा है।यह हादसा यात्रियों की सुरक्षा और तेज़ रफ्तार पर नियंत्रण की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करता है।
पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट: रात की दुर्घटनाओं में शराब और बिना हेलमेट बड़ी वजह
लखनऊ। राजधानी स्थित एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पीजीआई लखनऊ की एक अध्ययन रिपोर्ट में सामने आया है कि रात के समय होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में शराब पीकर वाहन चलाना और हेलमेट न पहनना बड़ी वजह बन रहे हैं। वर्ष 2018 से 2024 के बीच रात में भर्ती हुए घायलों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।डॉ. एके सिंह और डॉ. पीके मिश्रा द्वारा तैयार यह शोध रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल Cureus में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में कुल 3,705 घायलों को शामिल किया गया। रिपोर्ट की प्रमुख बातें रात में लाए गए घायलों में से लगभग हर दूसरे व्यक्ति ने शराब पी रखी थी। केवल एक तिहाई दोपहिया सवारों ने हेलमेट पहना था। चार पहिया वाहन चालकों में सिर्फ 41% ने सीट बेल्ट लगाई थी। कुल मामलों में 67.3% सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े थे। इनमें से 84.7% दोपहिया वाहन दुर्घटनाएं थीं। 78.3% मरीज पुरुष थे, औसत आयु 37.5 वर्ष। 44.5% मामलों में सिर की चोट पाई गई। आईसीयू और मृत्यु दर अध्ययन में पाया गया कि 58.4% मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। 45.8% को मैकेनिकल वेंटिलेशन की जरूरत हुई। कुल मृत्यु दर 4% रही, जिनमें से 42.2% मौतें 24 घंटे के भीतर हुईं। बुजुर्गों में बाथरूम में गिरने की घटनाएं रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि काफी बुजुर्ग बाथरूम में फिसलकर घायल हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह चिकनी टाइल्स को बताया गया है, जिनकी फिसलन से गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ की राय ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वैभव जायसवाल के अनुसार, दुर्घटनाओं में तेज रफ्तार, लापरवाही और जागरूकता की कमी बड़ी वजह है। बेहतर सड़कें और एक्सप्रेसवे यात्रा का समय तो कम कर रहे हैं, लेकिन सावधानी न बरतने पर हादसों का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जगह-जगह ट्रॉमा सेंटर बनाने और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।
यूपी में छह लघु जल विद्युत परियोजनाएं 42 साल के लिए लीज पर देने की तैयारी, विरोध तेज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार छह लघु जल विद्युत परियोजनाओं को 42 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को लीज पर देने की तैयारी में है। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने टेंडर जारी कर दिया है। टेंडर के अनुसार निजी कंपनियों को 1.5 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट अग्रिम प्रीमियम के आधार पर परियोजनाएं सौंपी जाएंगी, जिसके बाद वे 42 वर्षों तक उनका संचालन करेंगी।

प्रदेश की प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं

प्रदेश में पहले से
300 मेगावाट रिहंद,
99 मेगावाट ओबरा,
72 मेगावाट माताटीला (ललितपुर),
72 मेगावाट खारा

जल विद्युत परियोजनाएं संचालित हैं। इसके अतिरिक्त छह लघु जल विद्युत परियोजनाएं भी हैं, जिनके पास करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि और अन्य परिसंपत्तियां मौजूद हैं।

लीज पर प्रस्तावित परियोजनाएं

लीज पर दी जाने वाली परियोजनाओं में शामिल हैं –
भोला (2.7 मेगावाट)
सलावा (3 मेगावाट)
निर्गजनी (5 मेगावाट)
चित्तौरा (3 मेगावाट)
पलरा (0.6 मेगावाट)
सुमेरा (1.5 मेगावाट)
ये सभी परियोजनाएं अपर गंगा नहर पर स्थित हैं और लगभग 90 से 97 वर्ष पुरानी बताई जा रही हैं।

निजीकरण के खिलाफ संगठनों का विरोध

टेंडर जारी होते ही ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडेरेशन की आपत्ति

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडेरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि अपर गंगा नहर में वर्षभर पानी उपलब्ध रहता है, जिससे इन परियोजनाओं में लगातार बिजली उत्पादन संभव है।उन्होंने दावा किया कि सीमित निवेश से इनके पुनरुद्धार और आधुनिकीकरण की लागत एक वर्ष में वसूल की जा सकती है। साथ ही आरोप लगाया कि टेंडर में स्थापित क्षमता 15.5 मेगावाट के बजाय 6.3 मेगावाट दर्शाई गई है और परिसंपत्तियों का मूल्य भी कम आंका गया है। उन्होंने टेंडर निरस्त होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।

कर्मचारियों पर असर का मुद्दा

पॉवर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन और कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि यह कदम निजीकरण की नई रणनीति है। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है और आरक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।उन्होंने यह भी कहा कि निजी कंपनियां अपनी शर्तों पर नियुक्तियां करेंगी और सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है। संगठनों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर टेंडर निरस्त करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अलीगढ़ में चर्चा बनी अजब प्रेम की गजब कहानी
* शादी में नाचने आई डांसर संग दूल्हा फरार, नवविवाहिता ने लगाया हनीट्रैप का आरोप
अलीगढ़। अलीगढ़ के गांधी पार्क थाना क्षेत्र से एक ऐसी फिल्मी कहानी सामने आई है, जिसने दो परिवारों की खुशियों को अचानक चिंता में बदल दिया। शादी के जश्न, बैंड-बाजे और मेहमानों की भीड़ के बीच जो हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, हाल ही में इलाके के एक युवक की धूमधाम से शादी हुई थी। विवाह समारोह में रंग जमाने के लिए एक डांसर को बुलाया गया था। कार्यक्रम के दौरान दूल्हा और डांसर के बीच बातचीत शुरू हुई, जो देर रात तक चलती रही। परिजनों का कहना है कि शादी के कुछ ही समय बाद दूल्हा अचानक लापता हो गया। बाद में पता चला कि वह उसी डांसर के साथ घर छोड़कर चला गया है।
घटना के बाद नई नवेली दुल्हन ने आरोप लगाया है कि डांसर ने उसके पति को हनीट्रैप में फंसाकर अपने साथ ले गई। दुल्हन का कहना है कि शादी के दौरान ही डांसर ने योजनाबद्ध तरीके से उसके पति से नजदीकियां बढ़ाईं और फिर उसे बहला-फुसलाकर फरार हो गई।
परिवार वालों ने इस मामले की शिकायत पुलिस से की है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और दोनों की तलाश की जा रही है। मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल के आधार पर संभावित ठिकानों की छानबीन की जा रही है।
इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। जहां एक ओर दुल्हन और उसका परिवार सदमे में है, वहीं दूसरी ओर लोग इस ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पुलिस जांच के बाद ही सच्चाई पूरी तरह सामने आ सकेगी।
सीएम योगी आज सिंगापुर-जापान दौरे पर रवाना
यूपी को ‘मैन्युफैक्चरिंग हब ऑफ इंडिया’ बनाने की मुहिम तेज, 33 वैश्विक कंपनियों से करेंगे संवाद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश को ‘मैन्युफैक्चरिंग हब ऑफ इंडिया’ बनाने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज चार दिवसीय सिंगापुर और जापान दौरे पर रवाना होंगे। वर्ष 2017 में म्यांमार यात्रा के बाद यह उनका पहला विदेशी दौरा है, जिसे प्रदेश की निवेश कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
23-24 फरवरी को सिंगापुर और 25-26 फरवरी को जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 33 वैश्विक कंपनियों के शीर्ष प्रतिनिधियों से मुलाकात कर प्रदेश में निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार के अवसरों पर चर्चा करेंगे।

* जी-टू-बी और राउंड टेबल मीटिंग में होगा सीधा संवाद
दौरे की खास बात यह होगी कि मुख्यमंत्री जी-टू-बी (गवर्नमेंट टू बिजनेस) बैठकों और राउंड टेबल मीटिंग के माध्यम से निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे। वे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक रोडमैप, नीति स्थिरता, भूमि बैंक, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और कौशल विकास की संभावनाओं पर स्पष्ट और परिणामोन्मुख चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री प्रवासी भारतीयों और उत्तर प्रदेश मूल के लोगों को संबोधित करने के साथ स्कूली बच्चों से भी संवाद करेंगे और प्रदेश की बदली तस्वीर साझा करेंगे।

* सिंगापुर में 25 कंपनियों से मुलाकात
सिंगापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 25 प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे।

* डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी: Google, ST Telemedia Global Data Centres

* एग्रीबिजनेस: Japfa, Olam International

* लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर: Mapletree Investments, SATS Ltd

* ग्रीन और सौर ऊर्जा: AVPN, EDP Renewables

* इंडस्ट्रियल पार्क और एविएशन: Sembcorp Industries, Singapore Airlines Engineering Company

* ग्लोबल फंड्स: Temasek Holdings, GIC, Blackstone Inc.

* फिनटेक व बैंकिंग: DBS Bank

* जापान में ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर पर फोकस
जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री आठ प्रमुख कंपनियों से निवेश वार्ता करेंगे।

* ऑटोमोबाइल: Kubota, Suzuki

* सेमीकंडक्टर: Tokyo Electron

* इलेक्ट्रॉनिक्स: Toshiba

- ग्रीन हाइड्रोजन व रियल एस्टेट: Marubeni

* वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर कदम
प्रदेश सरकार का मानना है कि 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश उत्पादन और उपभोग दोनों का बड़ा केंद्र बन सकता है। मजबूत कानून व्यवस्था, नीति स्थिरता और तीव्र कनेक्टिविटी के आधार पर यह दौरा राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।मुख्यमंत्री की यह विदेश यात्रा न केवल निवेश आकर्षित करने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक मंच पर ‘ब्रांड यूपी’ को सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।
लखनऊ मेट्रो की पटरियां मानकों से कमजोर, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
* स्पीड लिमिट प्रमाणपत्र का नवीनीकरण नहीं, सुरक्षा मानकों की अनदेखी; तत्कालीन एमडी कुमार केशव पर उठे सवाल

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मेट्रो संचालन को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। Comptroller and Auditor General of India (CAG) की हालिया रिपोर्ट में सामने आया है कि मेट्रो की रेल पटरियां निर्धारित तकनीकी मानकों से कमजोर पाई गईं। रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की बात कही गई है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो ट्रैक से संबंधित कई विशेष मानकों का पालन नहीं किया गया। इतना ही नहीं, स्पीड लिमिट प्रमाणपत्र का समय पर नवीनीकरण भी नहीं कराया गया, जिससे उच्च गति पर संचालन के दौरान संभावित खतरे की आशंका बढ़ गई। यह स्थिति सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा को जोखिम में डालने वाली मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, परियोजना से जुड़ी प्रमुख कंपनियों जैसे Tata Group और Larsen & Toubro (L&T) ने पहले ही मेट्रो प्रशासन को तकनीकी खामियों को लेकर आगाह किया था। बावजूद इसके, आवश्यक सुधारात्मक कदम समय पर नहीं उठाए गए।

जांच में यह भी सामने आया है कि ‘कालिंदी’ नामक फर्म को पटरियां बिछाने का ठेका दिया गया था, जो कथित तौर पर कागजों पर ही सक्रिय बताई जा रही है। इस फर्म और मेट्रो प्रशासन के बीच सांठगांठ के आरोप भी उभरकर सामने आए हैं।

मामले में तत्कालीन प्रबंध निदेशक Kumar Keshav की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि परियोजना में अनियमितताओं के बावजूद उन्होंने प्रभावी निगरानी नहीं की। सूत्रों का दावा है कि इस मुद्दे पर संपर्क किए जाने के बावजूद उन्होंने फोन उठाना भी बंद कर दिया है।

इस पूरे मामले ने मेट्रो प्रशासन की कार्यशैली और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि संबंधित एजेंसियां इस रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई करती हैं और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण मोर्चा की रैली, हलवासिया चौराहे पर पुलिस से नोकझोंक


* सैकड़ों ब्राह्मण बटुकों के शंखनाद के साथ परिवर्तन चौक से गांधी प्रतिमा तक शांति मार्च का प्रयास

लखनऊ। यूजीसी कानून को वापस लेने, सवर्ण आयोग के गठन और आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर शनिवार को सवर्ण मोर्चा के बैनर तले परिवर्तन चौक से गांधी प्रतिमा, हजरतगंज तक शांति मार्च निकाला गया।
हजारों की संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने जगह-जगह बैरिकेडिंग की व्यवस्था की थी। परिवर्तन चौक और केडी सिंह बाबू मेट्रो स्टेशन के पास लगाए गए बैरिकेड्स को पार करते हुए कई कार्यकर्ता हलवासिया चौराहे तक पहुंच गए, जहां भारी पुलिस बल ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक भी हुई। बाद में कई कार्यकर्ता सड़क पर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया।
रैली की शुरुआत परिवर्तन चौक से हुई, जहां सैकड़ों ब्राह्मण बटुकों ने शंखनाद कर कार्यक्रम का आगाज किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तिरंगा और भगवा ध्वज लेकर मार्च में शामिल हुए। शंखनाद की गूंज के बीच मार्च आगे बढ़ा, जिससे क्षेत्र में विशेष माहौल देखने को मिला।
सवर्ण मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप सिंह और राष्ट्रीय प्रवक्ता पंडित अभिनव नाथ त्रिपाठी ने कहा कि यूजीसी का यह कानून सवर्ण समाज के हितों के विरुद्ध है और इसे वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सवर्ण आयोग के गठन, आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने तथा सवर्ण समाज के इतिहास के संरक्षण की मांग उठाई। साथ ही बिना पर्याप्त जांच के एससी-एसटी कानून के तहत दर्ज मुकदमों पर रोक लगाने की भी मांग की।
प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि रैली को प्रभावित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश पुलिस ने प्रदेश भर में सैकड़ों कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को हाउस अरेस्ट किया तथा नोटिस जारी किए। उन्होंने इसे जनआवाज दबाने का प्रयास बताया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय राजपूत करनी सेना के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह रघुवंशी, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा युवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अवनीश सिंह तथा अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष राजेंद्र नाथ त्रिपाठी अपने समर्थकों के साथ मौजूद रहे।
इसके अतिरिक्त सवर्ण मोर्चा के संरक्षक कुंवर दुर्गेश प्रताप सिंह, बसंत सिंह बघेल, टी.पी. पांडे (समाजसेवी), आनंद त्रिपाठी और मीडिया प्रभारी उमेश मिश्रा व प्रवक्ता पंडित अभिनव नाथ त्रिपाठी सहित अनेक कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल रहे।
SIR-2026 के तहत 22 फरवरी को प्रदेशभर में विशेष अभियान, बूथों पर मिलेंगे बीएलओ
* मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और त्रुटि सुधार का अवसर, सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 बजे तक चलेगा अभियान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने जानकारी दी कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR)-2026 के अंतर्गत दावा एवं आपत्ति अवधि में अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने तथा सूची को शुद्ध करने के उद्देश्य से चार विशेष अभियान दिवस निर्धारित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि पूर्व में 11 जनवरी, 18 जनवरी और 31 जनवरी 2026 को विशेष अभियान दिवस आयोजित किए जा चुके हैं। इसी क्रम में रविवार, 22 फरवरी 2026 को प्रदेश के सभी मतदेय स्थलों पर चौथा विशेष अभियान दिवस आयोजित किया जा रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विशेष अभियान दिवस पर प्रत्येक मतदेय स्थल पर प्रातः 10:30 बजे से अपराह्न 1:30 बजे तक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) उपस्थित रहेंगे। उनके पास 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित आलेख्य मतदाता सूची तथा फार्म-6, 6A, 7 और 8 उपलब्ध रहेंगे।
प्रत्येक मतदान केंद्र पर हेल्प डेस्क की व्यवस्था की जाएगी, जहां मतदाताओं को फार्म भरने में सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) को भी अभियान की जानकारी देकर सहयोग लिया जाएगा। सभासदों, ग्राम प्रधानों एवं स्वयंसेवकों का नियमानुसार सहयोग भी सुनिश्चित किया जाएगा।
अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भ्रमणशील रहकर पर्यवेक्षण करेंगे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेश के नागरिकों से अपील की है कि 22 फरवरी 2026 को अपने-अपने बूथ पर जाकर 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित मतदाता सूची में अपना एवं परिवार के सदस्यों का नाम अवश्य जांच लें। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज नहीं है या 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके युवाओं का नाम शामिल नहीं है, तो वे फार्म-6 भरकर बीएलओ को जमा करें। आवेदन ECINET मोबाइल एप्लीकेशन अथवा Voters' Service Portal (voters.eci.gov.in) के माध्यम से ऑनलाइन भी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त मतदाता सूची में दर्ज विवरण में किसी भी प्रकार की त्रुटि के सुधार के लिए फार्म-8 भरा जा सकता है।