Shashikant66

9 hours ago

# Covid19 मरीजो की नई उम्मीद #

भारत मे कोरोना वायरस कोहराम मचा रहा है। लगातार संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले 24 घंटे में संक्रमितों की संख्या 28 हजार के पार पहुच गया है। जबकि भारत मे कुल मामले करीब 8.5 लाख हो गए है।
अब तक कोरोना वायरस की सटीक दावा उपलब्ध नही होने के कारण लोग बेबस और लाचार है। हम ही नही पूरी दुनिया Vaccine के इंतजार में आस लगाए बैठी है।
इस बीच थोड़ी खुशी और राहत की खबर यह है कि, कुछ टेस्ट में Itolizumbo नामक दवा के संतोषजनक परिणाम मिले है। जिसे भारतीय दवा नियामक( Drugs Controller General of India ) ने आपातकाल में Covid19 के मरीजो पर इस्तेमाल की अनुमति दी है। इसका इस्तेमाल वैसे मरीजो के लिए किया जाएगा जिन्हें सांस लेने में ज्यादा तकलीफ है।
वैसे यह दवा कोरोना वायरस की दवा नही है पर इसके इस्तेमाल से मरीजो में सुधार देखा गया है। इसलिए आपातकाल में इसके इस्तेमाल की अनुमति दी गयी है।मूलतः यह सोराइसिस की दवा है जिसे Biocon Pharma Company बनाती है। सोराइसिस एक त्वचा रोग है।
भारत मे Remdesivir और Dexamethasone के बाद यह तीसरी दवा है जिसे भारत सरकार द्वारा Covid19  के मरीजो पर आपातकाल में इस्तेमाल की मंजूरी मिली है।

Shashikant66

Jul 04 2020, 02:05

# भारत ने बनाया कोरोना वैक्सीन #

किसी वैक्सीन के विकास में सालो/दशकों लग जाते है। पर आज दुनिया के वैज्ञानिक जिस रफ्तार से वैक्सीन के रिसर्च में लगे है वो बाकई काबिल-ए-तारीफ है।
वैक्सीन के विकास की प्रक्रिया कई स्तर से होकर गुजरती है। पहला काम Laboratory में सम्पन्न होता है। उसके बाद जानवरो पर परीक्षण किया जाता है। जब जानवरो पर वैक्सीन का इस्तेमाल सुरक्षित पाया जाता है तब,इसका परीक्षण मनुष्यों पर किया जाता है। मनुष्यों पर भी परीक्षण तीन चरणों मे सम्पन होता है।
पहला चरण- इसमें भाग लेनेवाले लोगो की संख्या कम होती है और लोग पूरी तरह स्वस्थ होते है।
दूसरा चरण- इसमें शामिल लोगों की संख्या अधिक होती है और इन्हें बाकी लोगो से अलग रखा जाता है।
तीसरा चरण- इसमें वैक्सीन की खुराक और मात्रा का मूल्यांकन किया जाता है। इस तरह से एक वैक्सीन के ट्रायल की प्रक्रिया सम्पन्न होती है जिसमे सालो का वक्त लग जाता है।
इस बार मामला थोड़ा अलग है। कोरोना महामारी ने जिस रफ्तार से इंसानो पर हमला किया है,इंसान भी उसी रफ्तार से उसे मिटाने में लगा है। इबोला वायरस के वैक्सीन बनाने में दुनिया को 16 साल लग गए, आज वही दुनिया एक साल के अंदर ही Covid19 के वैक्सीन तक पहुच गया।वैक्सीन बनाने के रेस में भारत ने भी अपना झंडा गाड़ दिया है।भारत की दो कंपनियों ने Covid19 का वैक्सीन तैयार कर लिया है। 
Bharat Biotech ने,ICMR (Indian Council of Medical & Research) और NIV (National Institute of Virology) के साथ मिलकर 'COVAXIN' नाम का वैक्सीन तैयार किया है। जबकि Cadila Healthcare की कंपनी Zydus ने 'Zycov-D' नामक वैक्सीन तैयार किया है। इन दोनों वैक्सीन को भारतीय औषधि महानियंत्रक(DCGI) ने मानव पर परीक्षण की अनुमति दे दी है।
Bharat biotech ने कहा कि,'Covaxin' का Human Trial जुलाई में शुरू होगा और उम्मीद किया जा रहा कि,अगस्त में इसे launch कर दिया जाएगा।

Shashikant66

Jun 29 2020, 01:35

# प्रयास, प्रयोग और परिणाम #

प्रयास- दिसंबर 2019 से पूरी दुनिया में फैले Corona virus ने इंसानो को पंगू बना दिया है।यह रोग है या जोग,कुछ समझ नही आ रहा। न दवा काम कर रहा न दुआ काम कर रहा। संक्रमण और मौतो का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अब तक 200 से अधिक देश Corona Virus की चपेट में आ चुके है। दुनिया मे अबतक एक करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके है जबकि पांच लाख लोगों की मौत हो चुकी है। भारत मे संक्रमितों की संख्या पांच लाख से अधिक तथा मौतो का आंकड़ा सोलह हजार के पार जा चुका है।
डॉक्टरों का कहना है कि,जब तक इसका कोई दवा या वैक्सीन नही बन जाता, लोगो को खुद इससे बचने के प्रयास करने होंगे, जैसे-Mask पहना, हाथ धोना तथा Social Distance का पालन करना। फिलहाल यही उपाय Corona महामारी से बचने में कारगर है।

प्रयोग- Covid19 के इलाज के लिए निरंतर नए प्रयोग जारी है। शुरुआत में डॉक्टरों को Plasma Therapy से काफी उम्मीद जगी थी पर वो ज्याफ देर तक कायम नही रह सकी। 'Hydroxychloroquine' ये दवा चर्चा में तब आई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसके लिए भारत को चेतावनी दे डाली। पर ये दवा भी Covid19 के इलाज में असफल रही। फिर अमेरिकी डॉक्टरों का ध्यान Anti Virul Drug 'Remdesivir' पर गया। डॉक्टरों का मानना है कि, Covid19 के first and second stage के मरीजो पर 'Remdesivir' के कुछ अच्छे परिणाम मिले है। इसको देखते हुए अमेरिका ने अपने यहा 'Remdesivir' को आपातकाल में इस्तेमाल की मंजूरी दी है। अमेरिका के बाद भारत और दक्षिण कोरिया भी अपने यहा 'Remdesivir' को आपातकाल में इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही भारत ने 'Dexamethoson' नाम की दवा को भी अपने यहा इस्तेमाल की मंजूरी दी है।
भारत मे Glenmark ने 'FabiFlu' नाम की दवा पेश किया है और दावा किया है कि, Covid19 के इलाज में कारगर है।
WHO की Chief Scientist सौम्या विश्वनाथन ने बताया कि, Astrazeneca & Moderna, Vaccine बनाने की रेस में सबसे आगे और बहुत नजदीक पहुच गए है।

परिणाम- अभी तक प्रयोग के 100% जैसे सकारात्मक परिणाम नही मिले है। पर साल के अंत तक कुछ अच्छे परिणाम के संकेत दिख रहे है। Vaccine बनाने में दुनिया के वैज्ञानिक जी-जान से लगे है। वैज्ञानिकों की कोशिश है कि,किसी भी तरह,जितनी जल्दी हो सके,इस पर काबू पाया जाए ताकि,धरती कब्रिस्तान बनने से बच जाए।

Nitish

Jun 26 2020, 13:43

इस साल बोर्ड परीक्षाएं देने वाले छात्रों के लिए बड़ी खबर है। CBSE और ICSE ने सुप्रीम कोर्ट में एफ़िडेविट फ़ाइल कर दिया है। इसमें दोनों बोर्ड ने कोर्ट को बताया कि कि 10वीं और 12वीं के नतीजे जुलाई मध्य तक घोषित हो सकते हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को 12वीं के ऑप्शनल एग्ज़ाम करवाने को इजाज़त दी है। बता दें कि आज सुप्रीम कोर्ट ने COVID19 के कारण जुलाई में ICSE & CBSE कक्षा 10 और 12 परीक्षाओं के संबंध में याचिका पर सुनवाई शुरू की । सीबीएसई और आईसीएसई ने भी अदालत को आश्वासन दिया कि परीक्षा के परिणाम 15 जुलाई तक घोषित किए जाएंगे। मार्किंग और बाद की परीक्षा को लेकर दोनों बोर्ड अपने-अपने नोटिफिकेशन जारी करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के अलावा किसी भी हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई नहीं होगी।

सीबीएसई ने कहा है कि 10वीं की बची हुई परीक्षा पूरी तरह से रद्द कर दी गई है जबकि 12वीं की परीक्षा भी रद्द है लेकिन जो बच्चे बची हुई परीक्षा देना चाहेंगे उन्हें हालात सामान्य होने पर मौका दिया जाएगा। इस बीच CBSE ने 10/12th की परीक्षा रद्द करने और वैकल्पिक अंक का फॉर्म्युला जारी किया। जिनके 3 से अधिक पेपर हो चुके हैं उन्हें बेस्ट 3 के औसत पर बाकी सब्जेक्ट में नम्बर मिलेंगे। जिनके 3 पेपर हुए हैं, वे बेस्ट 2 की औसत पर नम्बर पाएंगे। 12th के छात्रों को वैकल्पिक एक्जाम का मौका मिलेगा।

सुनवाई के दौरान आईसीएसई के वकील जयदीप गुप्ता ने कहा कि वे कक्षा 10 के छात्रों को बाद में परीक्षा लिखने का विकल्प दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं सीबीएसई का हलफनामा देख चुका हूं। हमारा हलफनामा कमोबेश ऐसा ही है।लेकिन "एवरेजिंग मार्क्स" का उसका फॉर्मूला सीबीएसई से अलग है।

सीबीएसई द्वारा घोषित प्रक्रिया के अनुसार चाहे क्लास 10वीं हो या 12वीं, जिन बच्चों की सभी परीक्षाएं हो चुकी हैं उनका परिणाम उन्हीं परीक्षापत्रों की जांच के आधार पर घोषित होगा। जो बच्चे 3 से ज्यादा विषयों की परीक्षा दे चुके हैं, उनके जिन 3 विषयों में सबसे ज्यादा नंबर होंगे उसके औसत के आधार पर बचे हुए विषयों के नंबर दिए जाएंगे। जो बच्चे सिर्फ 3 विषयों की परीक्षा दे पाए हैं उनके जिन 2 विषयों में सबसे ज्यादा नंबर होंगे उसके औसत के आधार पर बचे हुए विषयों के नंबर दिए जाएंगे।

दिल्ली में 12वीं कक्षा के कुछ ऐसे भी छात्र हैं।

railmitra

Jun 25 2020, 14:46

59 COVID-19 Patients Admitted in Isolation Coaches of Railways at Mau Junction

Uttar Pradesh has become the first state to admit the patients of COVID-19 in the isolation coach of the railway. Isolation coaches prepared from non-AC coaches of the railway have been deployed at Mau station. So far, 59 suspected patients of COVID-19 have been admitted in it. 

       

http://bit.ly/3esYHVs

FirstReporter

Jun 18 2020, 19:38

एक # COVID19 रोगी के एक करीबी रिश्तेदार की गुरुवार को  के पास  के बाहरी इलाके में दाह संस्कार करते समय रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। दो अन्य रिश्तेदार बेहोश हो गए और अस्पताल में दाखिल किया गया |

Shashikant66

Jun 11 2020, 00:38

# इंकलाब जिंदाबाद #

इश्क़/मोहब्बत/मेहबूब,इन सब से जी भर जाता है।'भूख' से ही कभी जी नही भरता।भूख स्वस्थ इंसानो की बीमारी है। COVID19 लाइलाज बीमारी है जबकि भूख का इलाज संभव है,पर कोई कर नही रह। पहले भूख का इलाज जरूरी है। इसी भूख की तड़प में लोग शहर क्या,सात समंदर पार चले जाते है।
रोटी/कपड़ा/मकान इंसानो की मूलभूत जरूरते है ना कि मजदूरो का। मजदूरो को हम इंसान समझते कहा है? मजदूर की जरूरत सिर्फ 'रोटी' रही है,कल भी और आज भी। कपड़ा और मकान नही है तो भी,काम चल जाएगा पर रोटी नही मिली तो जान चली जायेगी।
बचपन मे सडको पर,लाल झंडा लिए,'इंकलाब जिन्दाबाद, मजदूर एकता जिन्दाबाद,हमारी मांगे पूरी करो,जैसे नारे और लोगो की भीड़ को हमने देखा है। पर आज न तो लाल झंडा है इनकी हाथो में,ना कोई मांग ना कोई नारा। बस आँखों मे मदद की गुहार और दिल मे अपनो तक पहुचने की आस में,लोगो का हुजूम सडको पर भाग रहा है।
ये मजदूर है कौन? ये कोई तीसरी दुनिया के लोग नही,बल्कि आपके और हमारे बीच के ही है।हम आमलोग ही तो मजदूर है। बैंक मैनेजर भी मजदूर है और सरकार का मुख्य सचिव भी मजदूर है। हल चलानेवाला भी मजदूर है और कलम चलानेवाला भी मजदूर है। मजदूर अनेक होते है। राजा सिर्फ एक होता है। अर्थात राजा को छोड़ कर बाकी सब मजदूर है।
पत्थर तोड़नेवाला मजदूर आज मजबूर है सत्ता की बेरुखी से। सत्ताधारी हमेशा यही चाहता है कि,'मजदूर हमेशा मजबूर बना रहे।अगर मजबूत बन गया तो किसी दिन हमारी जगह पहुच जाएगा।' मजदूरो के दम पर ही शहर बसता है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकार की तरह,मजदूर भी किसी देश और शहरों के विकास का चौथा स्तंभ होता है।
ये वही मजदूर है जो पिछले चुनाव में,अपना वक्त और अपना पैसा लगा कर,हजारो मील का सफर तय कर अपने-अपने गांव पहुचे थे,सरकार चुनने के लिए। क्या यही दिन देखने के  लिए इन्होंने यहां सरकार चुना था?
वर्तमान सरकार हो या पिछली सरकार,सभी मजदूरो/गरीबो द्वारा चुनी हुई सरकार होती है।जिसे अमीर लोग हाईजेक कर अपने हिसाब से चलाते है और चला रहे है।
इस कोरोना महामारी में,लॉकडौन की मार झेल रहे लाखो मजदूर,क्या अगले चुनाव में वर्तमान सरकार के लिए 'जिन्दाबाद' का नारा लगाएंगे? शायद नही!
कल फिर इन मजदूरो के हाथों में लाल झंडा होगा और इंकलाब जिंदाबाद का नारा गूंजेगा सड़को पर। इस बार मांग नही,मजदूरो का सवाल होगा। और सरकार को जवाब देना होगा।

NEWSONE11

Jun 06 2020, 16:02

केजरीवाल ने दिल्ली में निजी अस्पतालों द्वारा बिस्तरों की ‘ब्लैक मार्केटिंग’ का लगाया आरोप


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी के निजी अस्पतालों में बिस्तरों की कालाबाजारी का आरोप लगाया है। जिसमे उन्होंने अपने फायदे के लिए लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में कोरोनो वायरस में तेजी देखी गई है। केजरीवाल ने एक वीडियो प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, कि बेड की अनुपलब्धता के बहाने COVID-19 मरीजों को प्रवेश देने से इनकार करने वाले अस्पतालों और उनकी सुविधाओं में बेड की कालाबाजारी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। “कुछ अस्पताल COVID19 रोगियों के प्रवेश से इनकार कर रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं उन लोगों को चेतावनी दे रहा हूं, जो सोचते हैं कि वे अन्य पार्टियों के अपने संरक्षकों के प्रभाव का इस्तेमाल कर बेड की कालाबाजारी कर सकेंगे।

राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे COVID-19 स्थिति पर बोलते हुए, शनिवार (6 जून, 2020) को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने निजी अस्पतालों को बाहर कर दिया। बता दे कि दिल्ली के कुछ निजी अस्पतालों ने COVID-19 रोगियों की सेवा से वंचित कर दिया है। जहा उन्होंने एक लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, ” कुछ अस्पताल COVID-19 रोगियों के प्रवेश से इनकार कर रहे हैं। मैं उन लोगों को चेतावनी दे रहा हूं, जो सोचते हैं कि वे अन्य पार्टियों के अपने सुरक्षाकर्मियों के प्रभाव का उपयोग करके बिस्तरों की ब्लैक-मार्केटिंग करने में सक्षम होंगे, आपको बख्शा नहीं जाएगा। ‘केजरीवाल ने लोगों को आश्वस्त किया कि वह सुनिश्चित करेंगे कि बिस्तरों की कालाबाजारी बंद हो और कहा कि कई निजी अस्पतालों ने ओवरचार्जिंग के साथ-साथ COVID-19 रोगियों को आवश्यक देखभाल से वंचित किया है, जो अनुचित है।

जबकि टेस्टिंग क्षमता पर बोलते हुए, दिल्ली के सीएम ने कहा कि भारत में अधिकतम परीक्षण दिल्ली में आयोजित किए जा रहे हैं और इसकी संख्या के पास कोई अन्य राज्य नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि स्पर्शोन्मुख लोगों को टेस्टिंग से बचना चाहिए। क्योंकि अब रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और उन सभी का टेस्ट कर पाना असंभव है।

railmitra

Jun 02 2020, 21:10

Railways Developed New Technique to Manufacture PPE Kits

Indian Railways has found an efficient technique to mass manufacture PPE kits to fight COVID-19. This will help ensure the high-reliability of PPE kits through the process of sewing with hot air seam seal tape. Learn more details!

      

http://bit.ly/3cqPLOu

Arrah_Bihar

Jun 01 2020, 19:11

जिलाधिकारी ने किया धनुपरा स्थित पर्यवेक्षण गृह का किया निरीक्षण

आरा। जिलाधिकारी रौशन कुशवाहा ने समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विधि विवादित किशोरों को आवासित करवाने वाले पर्यवेक्षण गृह का निरीक्षण किया। विदित हो कि भोजपुर जिला के उक्त गृह में भोजपुर के अतिरिक्त रोहतास, बक्सर एवं कैमूर के विधि विवादित किशोरों को आवासित करवाया जाता है। जिलाधिकारी ने आवासित विधि विवादित किशोरों से खाना, पढ़ाई, खेलकूद आदि समस्या संबंधी पूछताछ की। आवासित  किशोरों द्वारा गृह में दी जा रही सुविधाओं के संबंध में किसी प्रकार की शिकायत नहीं की गई एवं कहा कि covid19 के दौरान खाना, दवाई आदि की किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई।  जिलाधिकारी ने गृह की साफ-सफाई, खानपान एवं पढ़ाई की सुविधा को देखा एवं निर्देश दिया कि बरसात के मौसम को देखते हुए साफ सफाई और बेहतर करने की जरूरत है। बाथरुम में  बल्ब, स्विच बोर्ड को टूटा देखकर इसके स्थाई निदान हेतु निर्देश दिए। भवन में सुरक्षा के मापदंड देखने हेतु जिलाधिकारी ने परिसर में घूमकर देखा और आवश्यक निर्देश दिए। इस मौके पर सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई रश्मि चौधरी, अधीक्षक पर्यवेक्षण गृह एवं बाल संरक्षण पदाधिकारी सहित अन्य कर्मी उपस्थित थे।

Shashikant66

9 hours ago

# Covid19 मरीजो की नई उम्मीद #

भारत मे कोरोना वायरस कोहराम मचा रहा है। लगातार संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले 24 घंटे में संक्रमितों की संख्या 28 हजार के पार पहुच गया है। जबकि भारत मे कुल मामले करीब 8.5 लाख हो गए है।
अब तक कोरोना वायरस की सटीक दावा उपलब्ध नही होने के कारण लोग बेबस और लाचार है। हम ही नही पूरी दुनिया Vaccine के इंतजार में आस लगाए बैठी है।
इस बीच थोड़ी खुशी और राहत की खबर यह है कि, कुछ टेस्ट में Itolizumbo नामक दवा के संतोषजनक परिणाम मिले है। जिसे भारतीय दवा नियामक( Drugs Controller General of India ) ने आपातकाल में Covid19 के मरीजो पर इस्तेमाल की अनुमति दी है। इसका इस्तेमाल वैसे मरीजो के लिए किया जाएगा जिन्हें सांस लेने में ज्यादा तकलीफ है।
वैसे यह दवा कोरोना वायरस की दवा नही है पर इसके इस्तेमाल से मरीजो में सुधार देखा गया है। इसलिए आपातकाल में इसके इस्तेमाल की अनुमति दी गयी है।मूलतः यह सोराइसिस की दवा है जिसे Biocon Pharma Company बनाती है। सोराइसिस एक त्वचा रोग है।
भारत मे Remdesivir और Dexamethasone के बाद यह तीसरी दवा है जिसे भारत सरकार द्वारा Covid19  के मरीजो पर आपातकाल में इस्तेमाल की मंजूरी मिली है।

Shashikant66

Jul 04 2020, 02:05

# भारत ने बनाया कोरोना वैक्सीन #

किसी वैक्सीन के विकास में सालो/दशकों लग जाते है। पर आज दुनिया के वैज्ञानिक जिस रफ्तार से वैक्सीन के रिसर्च में लगे है वो बाकई काबिल-ए-तारीफ है।
वैक्सीन के विकास की प्रक्रिया कई स्तर से होकर गुजरती है। पहला काम Laboratory में सम्पन्न होता है। उसके बाद जानवरो पर परीक्षण किया जाता है। जब जानवरो पर वैक्सीन का इस्तेमाल सुरक्षित पाया जाता है तब,इसका परीक्षण मनुष्यों पर किया जाता है। मनुष्यों पर भी परीक्षण तीन चरणों मे सम्पन होता है।
पहला चरण- इसमें भाग लेनेवाले लोगो की संख्या कम होती है और लोग पूरी तरह स्वस्थ होते है।
दूसरा चरण- इसमें शामिल लोगों की संख्या अधिक होती है और इन्हें बाकी लोगो से अलग रखा जाता है।
तीसरा चरण- इसमें वैक्सीन की खुराक और मात्रा का मूल्यांकन किया जाता है। इस तरह से एक वैक्सीन के ट्रायल की प्रक्रिया सम्पन्न होती है जिसमे सालो का वक्त लग जाता है।
इस बार मामला थोड़ा अलग है। कोरोना महामारी ने जिस रफ्तार से इंसानो पर हमला किया है,इंसान भी उसी रफ्तार से उसे मिटाने में लगा है। इबोला वायरस के वैक्सीन बनाने में दुनिया को 16 साल लग गए, आज वही दुनिया एक साल के अंदर ही Covid19 के वैक्सीन तक पहुच गया।वैक्सीन बनाने के रेस में भारत ने भी अपना झंडा गाड़ दिया है।भारत की दो कंपनियों ने Covid19 का वैक्सीन तैयार कर लिया है। 
Bharat Biotech ने,ICMR (Indian Council of Medical & Research) और NIV (National Institute of Virology) के साथ मिलकर 'COVAXIN' नाम का वैक्सीन तैयार किया है। जबकि Cadila Healthcare की कंपनी Zydus ने 'Zycov-D' नामक वैक्सीन तैयार किया है। इन दोनों वैक्सीन को भारतीय औषधि महानियंत्रक(DCGI) ने मानव पर परीक्षण की अनुमति दे दी है।
Bharat biotech ने कहा कि,'Covaxin' का Human Trial जुलाई में शुरू होगा और उम्मीद किया जा रहा कि,अगस्त में इसे launch कर दिया जाएगा।

Shashikant66

Jun 29 2020, 01:35

# प्रयास, प्रयोग और परिणाम #

प्रयास- दिसंबर 2019 से पूरी दुनिया में फैले Corona virus ने इंसानो को पंगू बना दिया है।यह रोग है या जोग,कुछ समझ नही आ रहा। न दवा काम कर रहा न दुआ काम कर रहा। संक्रमण और मौतो का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अब तक 200 से अधिक देश Corona Virus की चपेट में आ चुके है। दुनिया मे अबतक एक करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके है जबकि पांच लाख लोगों की मौत हो चुकी है। भारत मे संक्रमितों की संख्या पांच लाख से अधिक तथा मौतो का आंकड़ा सोलह हजार के पार जा चुका है।
डॉक्टरों का कहना है कि,जब तक इसका कोई दवा या वैक्सीन नही बन जाता, लोगो को खुद इससे बचने के प्रयास करने होंगे, जैसे-Mask पहना, हाथ धोना तथा Social Distance का पालन करना। फिलहाल यही उपाय Corona महामारी से बचने में कारगर है।

प्रयोग- Covid19 के इलाज के लिए निरंतर नए प्रयोग जारी है। शुरुआत में डॉक्टरों को Plasma Therapy से काफी उम्मीद जगी थी पर वो ज्याफ देर तक कायम नही रह सकी। 'Hydroxychloroquine' ये दवा चर्चा में तब आई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसके लिए भारत को चेतावनी दे डाली। पर ये दवा भी Covid19 के इलाज में असफल रही। फिर अमेरिकी डॉक्टरों का ध्यान Anti Virul Drug 'Remdesivir' पर गया। डॉक्टरों का मानना है कि, Covid19 के first and second stage के मरीजो पर 'Remdesivir' के कुछ अच्छे परिणाम मिले है। इसको देखते हुए अमेरिका ने अपने यहा 'Remdesivir' को आपातकाल में इस्तेमाल की मंजूरी दी है। अमेरिका के बाद भारत और दक्षिण कोरिया भी अपने यहा 'Remdesivir' को आपातकाल में इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही भारत ने 'Dexamethoson' नाम की दवा को भी अपने यहा इस्तेमाल की मंजूरी दी है।
भारत मे Glenmark ने 'FabiFlu' नाम की दवा पेश किया है और दावा किया है कि, Covid19 के इलाज में कारगर है।
WHO की Chief Scientist सौम्या विश्वनाथन ने बताया कि, Astrazeneca & Moderna, Vaccine बनाने की रेस में सबसे आगे और बहुत नजदीक पहुच गए है।

परिणाम- अभी तक प्रयोग के 100% जैसे सकारात्मक परिणाम नही मिले है। पर साल के अंत तक कुछ अच्छे परिणाम के संकेत दिख रहे है। Vaccine बनाने में दुनिया के वैज्ञानिक जी-जान से लगे है। वैज्ञानिकों की कोशिश है कि,किसी भी तरह,जितनी जल्दी हो सके,इस पर काबू पाया जाए ताकि,धरती कब्रिस्तान बनने से बच जाए।

Nitish

Jun 26 2020, 13:43

इस साल बोर्ड परीक्षाएं देने वाले छात्रों के लिए बड़ी खबर है। CBSE और ICSE ने सुप्रीम कोर्ट में एफ़िडेविट फ़ाइल कर दिया है। इसमें दोनों बोर्ड ने कोर्ट को बताया कि कि 10वीं और 12वीं के नतीजे जुलाई मध्य तक घोषित हो सकते हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को 12वीं के ऑप्शनल एग्ज़ाम करवाने को इजाज़त दी है। बता दें कि आज सुप्रीम कोर्ट ने COVID19 के कारण जुलाई में ICSE & CBSE कक्षा 10 और 12 परीक्षाओं के संबंध में याचिका पर सुनवाई शुरू की । सीबीएसई और आईसीएसई ने भी अदालत को आश्वासन दिया कि परीक्षा के परिणाम 15 जुलाई तक घोषित किए जाएंगे। मार्किंग और बाद की परीक्षा को लेकर दोनों बोर्ड अपने-अपने नोटिफिकेशन जारी करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के अलावा किसी भी हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई नहीं होगी।

सीबीएसई ने कहा है कि 10वीं की बची हुई परीक्षा पूरी तरह से रद्द कर दी गई है जबकि 12वीं की परीक्षा भी रद्द है लेकिन जो बच्चे बची हुई परीक्षा देना चाहेंगे उन्हें हालात सामान्य होने पर मौका दिया जाएगा। इस बीच CBSE ने 10/12th की परीक्षा रद्द करने और वैकल्पिक अंक का फॉर्म्युला जारी किया। जिनके 3 से अधिक पेपर हो चुके हैं उन्हें बेस्ट 3 के औसत पर बाकी सब्जेक्ट में नम्बर मिलेंगे। जिनके 3 पेपर हुए हैं, वे बेस्ट 2 की औसत पर नम्बर पाएंगे। 12th के छात्रों को वैकल्पिक एक्जाम का मौका मिलेगा।

सुनवाई के दौरान आईसीएसई के वकील जयदीप गुप्ता ने कहा कि वे कक्षा 10 के छात्रों को बाद में परीक्षा लिखने का विकल्प दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं सीबीएसई का हलफनामा देख चुका हूं। हमारा हलफनामा कमोबेश ऐसा ही है।लेकिन "एवरेजिंग मार्क्स" का उसका फॉर्मूला सीबीएसई से अलग है।

सीबीएसई द्वारा घोषित प्रक्रिया के अनुसार चाहे क्लास 10वीं हो या 12वीं, जिन बच्चों की सभी परीक्षाएं हो चुकी हैं उनका परिणाम उन्हीं परीक्षापत्रों की जांच के आधार पर घोषित होगा। जो बच्चे 3 से ज्यादा विषयों की परीक्षा दे चुके हैं, उनके जिन 3 विषयों में सबसे ज्यादा नंबर होंगे उसके औसत के आधार पर बचे हुए विषयों के नंबर दिए जाएंगे। जो बच्चे सिर्फ 3 विषयों की परीक्षा दे पाए हैं उनके जिन 2 विषयों में सबसे ज्यादा नंबर होंगे उसके औसत के आधार पर बचे हुए विषयों के नंबर दिए जाएंगे।

दिल्ली में 12वीं कक्षा के कुछ ऐसे भी छात्र हैं।

railmitra

Jun 25 2020, 14:46

59 COVID-19 Patients Admitted in Isolation Coaches of Railways at Mau Junction

Uttar Pradesh has become the first state to admit the patients of COVID-19 in the isolation coach of the railway. Isolation coaches prepared from non-AC coaches of the railway have been deployed at Mau station. So far, 59 suspected patients of COVID-19 have been admitted in it. 

       

http://bit.ly/3esYHVs

FirstReporter

Jun 18 2020, 19:38

एक # COVID19 रोगी के एक करीबी रिश्तेदार की गुरुवार को  के पास  के बाहरी इलाके में दाह संस्कार करते समय रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। दो अन्य रिश्तेदार बेहोश हो गए और अस्पताल में दाखिल किया गया |

Shashikant66

Jun 11 2020, 00:38

# इंकलाब जिंदाबाद #

इश्क़/मोहब्बत/मेहबूब,इन सब से जी भर जाता है।'भूख' से ही कभी जी नही भरता।भूख स्वस्थ इंसानो की बीमारी है। COVID19 लाइलाज बीमारी है जबकि भूख का इलाज संभव है,पर कोई कर नही रह। पहले भूख का इलाज जरूरी है। इसी भूख की तड़प में लोग शहर क्या,सात समंदर पार चले जाते है।
रोटी/कपड़ा/मकान इंसानो की मूलभूत जरूरते है ना कि मजदूरो का। मजदूरो को हम इंसान समझते कहा है? मजदूर की जरूरत सिर्फ 'रोटी' रही है,कल भी और आज भी। कपड़ा और मकान नही है तो भी,काम चल जाएगा पर रोटी नही मिली तो जान चली जायेगी।
बचपन मे सडको पर,लाल झंडा लिए,'इंकलाब जिन्दाबाद, मजदूर एकता जिन्दाबाद,हमारी मांगे पूरी करो,जैसे नारे और लोगो की भीड़ को हमने देखा है। पर आज न तो लाल झंडा है इनकी हाथो में,ना कोई मांग ना कोई नारा। बस आँखों मे मदद की गुहार और दिल मे अपनो तक पहुचने की आस में,लोगो का हुजूम सडको पर भाग रहा है।
ये मजदूर है कौन? ये कोई तीसरी दुनिया के लोग नही,बल्कि आपके और हमारे बीच के ही है।हम आमलोग ही तो मजदूर है। बैंक मैनेजर भी मजदूर है और सरकार का मुख्य सचिव भी मजदूर है। हल चलानेवाला भी मजदूर है और कलम चलानेवाला भी मजदूर है। मजदूर अनेक होते है। राजा सिर्फ एक होता है। अर्थात राजा को छोड़ कर बाकी सब मजदूर है।
पत्थर तोड़नेवाला मजदूर आज मजबूर है सत्ता की बेरुखी से। सत्ताधारी हमेशा यही चाहता है कि,'मजदूर हमेशा मजबूर बना रहे।अगर मजबूत बन गया तो किसी दिन हमारी जगह पहुच जाएगा।' मजदूरो के दम पर ही शहर बसता है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकार की तरह,मजदूर भी किसी देश और शहरों के विकास का चौथा स्तंभ होता है।
ये वही मजदूर है जो पिछले चुनाव में,अपना वक्त और अपना पैसा लगा कर,हजारो मील का सफर तय कर अपने-अपने गांव पहुचे थे,सरकार चुनने के लिए। क्या यही दिन देखने के  लिए इन्होंने यहां सरकार चुना था?
वर्तमान सरकार हो या पिछली सरकार,सभी मजदूरो/गरीबो द्वारा चुनी हुई सरकार होती है।जिसे अमीर लोग हाईजेक कर अपने हिसाब से चलाते है और चला रहे है।
इस कोरोना महामारी में,लॉकडौन की मार झेल रहे लाखो मजदूर,क्या अगले चुनाव में वर्तमान सरकार के लिए 'जिन्दाबाद' का नारा लगाएंगे? शायद नही!
कल फिर इन मजदूरो के हाथों में लाल झंडा होगा और इंकलाब जिंदाबाद का नारा गूंजेगा सड़को पर। इस बार मांग नही,मजदूरो का सवाल होगा। और सरकार को जवाब देना होगा।